इनर मणिपुर से लोकसभा सांसद बिमोल अकोइजाम ने रविवार को कहा कि जब तक पूर्वोत्तर राज्य में लोगों की स्वतंत्र आवाजाही को रोका जाता है, तब तक हालात सामान्य नहीं हो सकते। अकोइजाम ने इस बात का जिक्र ऐसे समय में किया है, जब कुछ समूहों ने मैतेई लोगों के लिए पवित्र स्थल थांगजिंग पहाड़ियों पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सांसद अकोइजाम ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैतेई लोग चुराचांदपुर जिले में थांगजिंग पहाड़ियों और कांगपोकपी जिले में कुबरू के पवित्र स्थानों पर नहीं जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित करने का मामला सांप्रदायिक नहीं, बल्कि मौलिक मुद्दा है। यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों और शासन का मामला है।
ये भी पढ़ें: Rice Scam: संजय भंडारी का दावा- भगोड़ा घोषित करने की ED की याचिका गलत; लंदन हाईकोर्ट के आदेश को बनाया आधार
संसद में बोलने की अनुमति न दिए जाने पर भी जताई नाराजगी
सांसद बिमोल ने कहा कि जब तक लोगों की स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं होगी और आंतरिक रूप से विस्थापित लोग अपने घरों को वापस नहीं लौटेंगे, तब तक राज्य में सामान्य हालात नहीं हो सकते हैं। अकोइजाम ने राष्ट्रपति शासन की घोषणा के दौरान संसद में बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया, 'मैं और आउटर मणिपुर के सांसद अल्फ्रेड संसद में मौजूद थे, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई।'
14 अप्रैल को थांगजिंग पहाड़ियों पर जाने से रुक गए थे मैतेई लोग
इससे पहले, 14 अप्रैल को समुदाय के बुजुर्गों की सलाह के बाद बड़ी संख्या में मैतेई लोगों ने चुराचांदपुर में थांगजिंग पहाड़ियों पर जाने की अपनी योजना रद्द कर दी थी। वह बिष्णुपुर जिले के मोइरांग से घर लौट आए थे। कुकी-जो समूहों ने तीर्थयात्रियों को 'बफर जोन' पार करने के खिलाफ चेतावनी दी थी और विरोध प्रदर्शन भी किया था। बता दें कि बफर जोन मैतेई नियंत्रित इंफाल घाटी और कुकी प्रभुत्व वाले पहाड़ी जिलों को अलग करता है। इस पर सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा है।
ये भी पढ़ें: SC पर निशिकांत दुबे-दिनेश शर्मा की टिप्पणी विवाद: 'सांसदों के बयान से किनारा BJP का पाखंड'; कांग्रेस का पलटवार
13 फरवरी को मणिपुर में लगाया राष्ट्रपति शासन
बता दें कि मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष में 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा, हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। दोनों के बीच संघर्ष के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। हालात को देखते हुए 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गया, जिसका कार्यकाल 2027 तक है।
संबंधित वीडियो