हिंसाग्रस्त मणिपुर में शुक्रवार को अलग-अलग घटनाओं में एक पुलिस कमांडो समेत चार लोगों मौत हो गई और कई घायल हुए हैं। ये घटनाएं विष्णुपुर और चुराचांदपुर जिलों में हुईं। अधिकारियों ने बताया कि बिष्णुपुर जिले के मोइरांग ट्यूरेल मपन में शाम के वक्त संदिग्ध उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में पुलिस कमांडो पुखरामबम रणबीर की मौत हो गई। रणबीर के सिर में गोली लगी थी, उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वहीं, विष्णुपुर और चुरचांदपुर जिलों के तीन सीमाई गांवों-कांगवई, सोंगडो और अवांग लेखई में गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 1.40 बजे संदिग्ध मैतेई और कुकी विद्रोहियों के बीच गोलीबारी एक किशोर समेत तीन लोग मारे गए और कई घायल हो गए। भीड़ ने इन गांवों में सुरक्षा बलों को जाने से रोक दिया, बाद में दूसरे रास्ते से अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया।
सूत्रों के मुताबिक बीएन बीएसएफ टुकड़ियों, जो अवांग लीकाई क्षेत्र, फौगाकचाओ इखाई (बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिले का सीमावर्ती क्षेत्र) में तैनात थी को भी भारी गोलीबारी का सामना करना पड़ा। इसके बाद बीएसएफ के जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। जानकारी के मुताबिक लोगीबारी शुक्रवार सुबह करीब साढ़े सात बजे रूकी। सूत्रों के मुताबिक सशस्त्र विद्रोहियों की आपसी गोलीबारी में दो गोली की मौत हो गई जबकि कुकी विद्रोहियों और मणिपुर पुलिस कमांडो के बीच गोलीबारी में तीन अन्य घायल हो गए। अर्धसैनिक बल और मणिपुर सशस्त्र पुलिस के जवान भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक घटना में कुछ के घायल होने की भी खबर है।
मणिपुर पुलिस की तरफ से शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में स्थिति सामान्य रही है। केवल कुछ इलाकों में फायरिंग की छिटपुट घटनाएं हुई हैं। दरअसल, तीन मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 100 से अधिक लोगों की जान चली गई है और 3,000 से अधिक घायल हुए हैं। हालात को काबू करने और राज्य में सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए मणिपुर पुलिस के अलावा लगभग 40,000 केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को कोर्ट ने किया तलब
इस बीच जानकारी मिली है कि इंफाल की एक स्थानीय कोर्ट ने छह जुलाई को हैदराबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर खाम खान सुआन हाउजिंग के खिलाफ दायर आरोपों पर संज्ञान लिया है। राज्य में लगातार जातीय संघर्ष में मैतेई संगठनों की भूमिका और राज्य की मिलीभगत के बारे में मुखर रहे हैं। प्रोफेसर हाउजिंग मणिपुर के एक आदिवासी समुदाय से हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी को एक नोटिस जारी किया जाए। इस मामले की अलगी सुनवाई 28 जुलाई को होगी। जानकारी के मुताबित प्रोफेसर ने एक साक्षात्कार दिया था, जिसके खिलाफ एक सामाजिक कार्यकर्ता कोर्ट पहंचा था।
सीपीआई-सीपीआई (एम) का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मणिपुर पहुंचा, राज्यपाल से मिले
इस बीच, सीपीआई और सीपीआई (एम) का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल, जिसमें सीपीआई के तीन सांसद और सीपीआई (एम) के दो सांसद शामिल हैं, हिंसाग्रस्त मणिपुर पहुंचे और स्थानीय लोगों से मिले। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने कहा, नफरत और कलह का 'डबल इंजन' भाजपा चला रही है।भाजपा के कुशासन के तहत, मणिपुर पिछले दो महीनों से जल रहा है और केंद्र और राज्य सरकार दोनों रणनीतिक रूप से स्थित राज्य में शांति और सामान्य स्थिति लाने में विफल रही हैं। प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम, पी. संदोश कुमार और लोकसभा सांसद के. सुब्बारायण सांसद है जबकि सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य और जॉन ब्रिटास संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मिले।