इससे दो दिन पहले मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा था कि उन किसानों को सुरक्षा प्रदान करने का फैसला लिया गया है, जो फसल के लिए कृषि कार्य शुरू करेंगे। एक सूत्र ने कहा, 'कई मंत्रियों, विधायकों, अन्य राजनेताओं, सिविल सेवकों, पूर्व नौकरशाहों की सुरक्षा कम कर दी गई है, जिससे लगभग 2,000 सुरक्षाकर्मियों को मुक्त कर दिया गया है। उन्हें मणिपुर में संकटग्रस्त क्षेत्रों में खेती में लगे किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा।'
सोमवार को एकीकृत कमान की बैठक के बाद मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि कृषि कार्य शुरू करने वाले किसानों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, 'कृषि उद्देश्य के लिए सरकार ने पांच जिलों में अधिक सुरक्षाकर्मी देने का फैसला किया है। कांगपोकपी, चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम और काकचिंग जिलों में करीब 2,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
ऐसी आशंकाएं हैं कि सुरक्षा चिंताओं के कारण किसान उन क्षेत्रों में अपनी कृषि गतिविधियों को करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, जो इम्फाल घाटी की पहाड़ियों से मिलती हैं। मैतई घाटी में रहते हैं और कुकी पहाड़ियों में रहते हैं। दोनों समुदाय जातीय आधार पर बंटे हुए हैं, जिसके कारण पिछले दो महीनों में कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। इस बीच, मणिपुर में इंटरनेट पर प्रतिबंध को और बढ़ा दिया गया है ताकि उन अफवाहों को रोका जा सके जो मौजूदा माहौल को खराब कर सकती हैं।