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Manipur Encounters: अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर 6 महीने में फैसला करें, SC का हाई कोर्ट को निर्देश

Thu, 20 Oct 2022 10:15 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जा रही थी और एसआईटी द्वारा जांच किए जा रहे 39 मामलों में से 19 में आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 18 में क्लोजर रिपोर्ट लगायी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2000 से 2012 तक कथित मुठभेड़ में शामिल सुरक्षा बलों के खिलाफ अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर छह माह के भीतर निर्णय करने का मणिपुर हाई कोर्ट को निर्देश दिया। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने इस बीच सीबीआई को अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को कुछ अतिरिक्त कार्य सौंपने की अनुमति दे दी। 

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अदालत ने यह निर्णय तब लिया जब उसे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने अवगत कराया कि कथित न्यायेतर मुठभेड़ मामले में एसआईटी की जांच का कार्य पूरा हो गया है। भाटी ने बताया कि समय-समय पर इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जा रही थी और एसआईटी द्वारा जांच किए जा रहे 39 मामलों में से 19 में आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 18 में क्लोजर रिपोर्ट लगायी गई है।

एएसजी ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए एसआईटी के सदस्यों को कुछ अतिरिक्त कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस और मनेका गुरुस्वामी ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया कि सभी मामलों की जांच पूरी हो गई है। दोनों अधिवक्ताओं ने दलील दी कि एसआईटी ने जो जांच की है वह केवल एक हिस्सा है, जबकि शेष हिस्सा अब भी अधूरा है। 
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जब्त किए गए पोस्त के भूसे में मॉर्फिन और मेकोनिक एसिड होने पर अपराध साबित 
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एक बार जब यह स्थापित हो जाता है कि जब्त किए गए पोस्त के भूसे में मॉर्फिन और मेकोनिक एसिड होता है, तो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत किसी आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए किसी अन्य परीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या बरामद प्रतिबंधित पदार्थों की प्रजातियों - पोस्ता भूसी और अफीम की भूसी को विशेष रूप से निर्दिष्ट करना आवश्यक है।  

यह देखा गया कि 1985 के अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों की तस्करी के खतरे को रोकना था। पहले के अधिनियमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और वैज्ञानिक अध्ययनों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी को पता है कि अफीम के उत्पादन के लिए 'पैपावर सोम्निफरम एल' संयंत्र मुख्य स्रोत था और अध्ययनों ने स्थापित किया है कि 'पैपावर सोम्निफरम एल' में मॉर्फिन होता है।  

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