हिंसाग्रस्त मणिपुर में भले ही धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे हों, लेकिन मणिपुर के विभिन्न अस्पतालों के मुर्दाघरों में रखे गए करीब 88 शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इनमें से ज्यादातर आदिवासियों के शव बताए जा रहे हैं। गैर-आदिवासियों के लगभग सभी शवों की पहचान उनके रिश्तेदारों ने कर ली है। अधिकांश शव, जो सड़ने की स्थिति में हैं, अभी तक पहचान नहीं की जा सकी है। हालांकि शवों की पहचान करने की जिम्मेदारी आमतौर पर पुलिस की होती है।
सूत्रों के मुताबिक जिन शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, वे इंफाल पश्चिम जिले के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस) के मुर्दाघर, इंफाल पूर्वी जिले में नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जेएनआईएमएस) और चुराचांदपुर जिला अस्पताल में रखे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक घाटी के दो जिला अस्पतालों, रिम्स और जेएनआईएमएस में करीब 53 शवों की पहचान नहीं हो पाई है, इनमें से ज्यादातर कुकी समुदाय के हैं, जबकि कुकी-ज़ो समुदायों के लगभग 35 शव वर्तमान में चुराचांदपुर के जिला अस्पताल में हैं। सूत्रों के मुताबिक चुराचांदपुर के जिला अस्पताल के मुर्दाघर में फिलहाल करीब 30-35 शव रखे हुए हैं। इन में से 3 शव मैतेई के बताए जा रहे हैं।