मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में दो सशस्त्र गुटों के बीच हुई फायरिंग में मारे गए 13 लोगों की पहचान हो गई है। संदिग्ध वीबीआईजी समूह ने दावा किया है कि मारे गए सभी लोग उनके कैडर सदस्य थे। इस बीच, मणिपुर पुलिस ने सुरक्षाबलों के सहयोग से शवों को मणिपुर ले आई है। करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
सूत्रों के मुताबिक यह घटना सोमवार की सुबह करीब 8.30 बजे भारत-म्यामांर की सीमा पर तेंगनौपाल जिले के माओहलंग और लीथो जंगल के सामान्य क्षेत्र में संदिग्ध वीबीआईजी और संदिग्ध कुकी सशस्त्र समूह के बीच एक सशस्त्र संघर्ष हुआ। इस घटना में मैतेई समुदाय के 13 लोगों की मौत हो गई। बाद में शवों को असम राइफल्स और तेंगनौपाल पुलिस इन शवों को इंफाल स्थित जेएनआईएमएस अस्पताल ले गई।
मारे गए लोगों की पहचान थौबाल निवासी मीस्नाम सनाजाओबा सिंह, सागोलबंद नेप्रा मेनजोर के कोन्जेंगबाम मेधाबंता, सागोलबंद नेप्रा मेनजोर के ओइनम लोकेन, सलाम कोन्जिल भाग-2 के निंगथौजम टोम्बा, वांगबल मयाई लीकाई के मायेंगबाम रोशन मैतेई, थोइडिंगजाम लेइकाई के मोइरांगथेम किंग्सन मैतेई, अवांग लीकाई के चोंगथम लैमडिंगनबा, तोरोंगथेल के पुथेम अजय मैतेई, शौगैजम कृष्णकांत मैतेई, टोरबंग बाजार ममांग लीकाई के थिंगोम रॉकी, चिंगखम नेखेल, लीबाकनगाकपा के फांजौबाम नोरेन सिंह और मोरेह को येंद्रेम्बम अथौबा सिंह उर्फ नाओचा के रूप में हुई है।
सूत्रों के मुताबिक संदिग्ध वीबीआईजी 15 से 16 व्यक्तियों के दो समूहों में थे। पहले समूह की सशस्त्र मुठभेड़ हुई, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई। अब तक किसी भी विद्रोही समूह ने हत्याओं का कि जिम्मेदारी नहीं ली है। जबकि संदिग्ध वीबीआईजी समूह ने दावा किया है कि मारे गए सभी लोग उनके कैडर के सदस्य थे।