भारत के पहले अंतरग्रहीय अंतरिक्ष मिशन मंगलयान ने मंगल ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करते हुए रविवार को तीन साल पूरे कर लिए। इस मिशन को 5 नवंबर, 2013 को मंगल यात्रा पर भेजा गया था। इसके बाद ‘मंगलयान’ ने 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचकर इतिहास रच दिया था।
मंगलयान की सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि भारत अपने पहले प्रयास में ही मंगल पर पहुंच जाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया था। मंगल पर पहुंचने वाले अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों को कई प्रयासों के बाद ये सफलता मिली थी।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने कहा कि सैटेलाइट बहुत ही अच्छी स्थिति में है और उम्मीद के अनुरूप कार्य कर रहा है। इसरो के जनसंपर्क निदेशक देवीप्रसाद कार्निक ने कहा कि मंगलयान ने मंगल की अब तक 400 परिक्रमाएं कर ली हैं और मंगल कक्षा यान (मॉम) से प्राप्त अन्य अहम आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण का काम चल रहा है।
पिछले तीन वर्षों में मंगलयान ने मिशन उद्देश्यों को पूरा करने के साथ कई अनुसंधान भी किया है। मंगल की धरती पर मौजूद सल्फेट और लोहा जैसे धातुओं की पहचान, मंगल ग्रह की अनदेखी तस्वीरों के अलावा धूमकेतु साइडिंग स्प्रिंग के मंगल के करीब से गुजरने की भी तस्वीरें भेजी।