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मंगलूरू ब्लास्ट: मंदिर में रखने से पहले ही फट गया था कुकर बम, साढ़े तीन साल बाद आतंकी शारिक को 10 साल की सजा

Mon, 27 Apr 2026 06:03 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने मंगलूरू कुकर ब्लास्ट मामले में आतंकी आरोपी मोहम्मद शारिक को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। शारिक ने अदालत के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। यह घटना 19 नवंबर 2022 को मंगलूरू के कंकनाडी इलाके में हुई थी। 
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मंगलूरू बम धमाके में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : ANI + PTI
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विस्तार
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बंगलूरू में 2022 के चर्चित मंगलूरू कुकर विस्फोट कांड के आरोपी मोहम्मद शारिक को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मंगलुरु कुकर विस्फोट मामले में आतंकी आरोपी मोहम्मद शारिक को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। शारिक ने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। 
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पुलिस की भूमिका पर क्या बोले गृह मंत्री?
वहीं राज्य के गृह मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिस ने कानून के तहत अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई है। जरूरी सबूत इकट्ठा कर कोर्ट में पेश किए गए हैं। उन्होंने कहा, 'हमें न्यायपूर्ण फैसला मिलने की उम्मीद है, बाकी हमें इंतजार करना चाहिए।' उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी अलग बात है, लेकिन असली महत्व कानूनी प्रक्रिया का है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला 19 नवंबर 2022 का है, जब मंगलूरू में एक ऑटो रिक्शा के अंदर कुकर बम धमाका हुआ था। इस धमाके में मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक खुद ही गंभीर रूप से झुलस गया था, क्योंकि बम समय से पहले फट गया था। जांच एजेंसी एनआईए के मुताबिक, वह इस बम को कहीं लगाने ले जा रहा था, लेकिन टाइमर में गड़बड़ी के कारण विस्फोट हो गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि शारिक कथित तौर पर कादरी मंजुनाथ मंदिर में बम लगाने जा रहा था, तभी बीच रास्ते में ही बम फट गया, जिससे एक बड़ी घटना टल गई।

आरोपी ने तीन साल बाद कबूला जुर्म
करीब तीन महीने तक इलाज के बाद शारिक को पूछताछ के लिए एनआईए की हिरासत में लिया गया था। बाद में एजेंसी ने जांच पूरी कर मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। करीब तीन साल बाद इस केस में बड़ा मोड़ तब आया जब मोहम्मद शारिक ने अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया। पहले उसने 2024 में आरोप तय होने पर खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन दिसंबर 2025 में उसने अपना बयान बदलते हुए अपराध स्वीकार कर लिया। उसने सीआरपीसी की धारा 229 के तहत दोषी मानने की याचिका दाखिल की थी।
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आईएसआईएस से प्रेरित था आरोप शारिक- एनआईए
एनआईए के अनुसार, मोहम्मद शारिक शिवमोगा के एक ऐसे मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है जो कथित तौर पर आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरित था और 2020 से कई संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहा है। बताया जाता है कि वह पहले भी देश विरोधी संदेश दीवारों पर लिखने के मामले में गिरफ्तार हो चुका था।

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