राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 19 नवंबर को मंगलूरू में हुए ऑटो-रिक्शा विस्फोट मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इसी क्रम में मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीक से पूछताछ की है। एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। गौरतलब है कि मंगलुरू में हुए इस विस्फोट में मुख्य संदिग्ध सहित दो लोग घायल हो गए थे। इस्लामी प्रतिरोध परिषद (आईआरसी) संगठन ने कथित तौर पर विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी।
पुलिस ने कहा कि एनआईए अधिकारियों की एक टीम ने दक्षिण भारत में आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के बारे में संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने के लिए शारिक से लंबी अवधि तक पूछताछ की। इससे पहले भी एनआईए के अधिकारियों ने उसका बयान दर्ज किया था, लेकिन अब वे आतंकी नेटवर्क और उनकी गतिविधियों की जड़ तक पहुंचने के उद्देश्य से उससे पूछताछ कर रही है।
गौरतलब है कि विस्फोट का मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली का रहने वाला है। वह 19 नवंबर को एक ऑटोरिक्शा में कुकर में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) ले जा रहा था। उसी समय मंगलुरू के बाहरी इलाके में विस्फोट हुआ था। विस्फोट में शारिक 45 प्रतिशत जल गया था, जबकि ऑटोरिक्शा चालक भी घायल हो गया था। मुख्य आरोपी का इलाज कर्नाटक के मंगलुरु के फादर मुलर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया जा रहा है।
पुलिस ने इसको आतंकी घटना करार दिया था और शारिक को मुख्य संदिग्ध बताते हुए यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था। कर्नाटक सरकार ने केंद्र से घटना की जांच एनआईए से कराने की मांग की थी। जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।
इस संगठन ने ली थी जिम्मेदारी
इस मामले में इस्लामिक रेजिस्टेंस काउंसिल ने जिम्मेदारी ली थी। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में इसका दावा किया गया था। इसमे कहा गया था कि 'हम इस्लामिक रेजिस्टेंस काउंसिल (आईआरसी) संदेश देना चाहते हैं कि हमारे एक मुजाहिद भाई मोहम्मद शरीक ने मंगलुरु में भगवा आतंकवादियों के गढ़ कादरी (दक्षिण कन्नड़ जिले में) में हिंदुत्व मंदिर पर हमला करने का प्रयास किया था।'
पोस्ट में आगे लिखा गया था कि 'हालांकि यह ऑपरेशन अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाया, फिर भी हम इसे ट्रेडक्राफ्ट और रणनीति के दृष्टिकोण से एक बड़ी सफलता मानते हैं। क्योंकि मुजाहिद भाई के वांछित होने के बाद भी और राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां उसका पता नहीं लगा सकीं थीं।