पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मंगलवार से अपनी पार्टी का चुनाव अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके बाद अगले दिन ही वह मालदा व मुर्शिदाबाद रवाना हो जाएंगी। इन दोनों जिलों में कांग्रेस व वामपंथी दलों के बीच प्रस्तावित तालमेल को लेकर स्थानीय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं में काफी असंतोष है। ममता इसी असंतोष को अपनी पार्टी के हित में भुनाना चाहती हैं।
ममता अपने अभियान के दौरान राज्य में कम से कम डेढ़ सौ चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगी। मुर्शिदाबाद के कांग्रेसी कार्यकर्ता अपनी जीती हुई डोमकल, हरिहरपाड़ा, खारग्राम और शमशेरगंज सीटों को वामपंथी दलों को देने के फैसले के खिलाफ हैं। इसका फायदा उठाते हुए ममता ने शमशेरगंज में अमीरुल इस्लाम को अपना उम्मीदवार बना दिया है। अमीरुल अभी बीते शुक्रवार तक स्थानीय ब्लाक कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
उनकी दलील है कि 2004 में अधीर चौधरी ने एक पुस्तिका जारी कर बताया था कि वामपंथी शासनकाल के दौरान जिले में 593 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं। ऐसे में वाममोर्चा से हाथ मिलाने का मतलब स्थानीय लोगों के साथ धोखा करना है। कांग्रेस नेता भी मानते हैं कि स्थानीय कार्यकर्ताओं के असंतोष पर काबू पाना मुश्किल होगा। जिला कांग्रेस नेता शिलादित्य हालदार का कहना है कि यहां पार्टी के कार्यकर्ताओं ने माकपा कैडरों का जुल्म झेला है।
ऐसे में डोमकल या हरिहरपाड़ा सीट माकपा को सौंपने से उन लोगों में भारी नाराजगी है। मालदा में भी यही स्थिति है। इस जिले को अब्दुल गनी खान चौधरी के जमाने से ही कांग्रेस का किला समझा जाता है। जिले मेंकुल 12 विधानसभा सीटें हैं। तालमेल की शुरूआती बातचीत के तहत कांग्रेस ने यहां महज दो सीटें माकपा को देने की हामी भरी है, लेकिन माकपा इसके
लिए तैयार नहीं है।