पश्चिम बंगाल में नई पार्टी बनाकर महज 13 साल के भीतर उसे सत्ता के शिखर तक पहुंचाने और उसके बाद लगातार दूसरी बार भारी बहुमत के साथ सत्ता बनाए रखने वाली ममता बनर्जी शुरू से ही जुझारू और सादगी पसंद रही हैं।
ममता का राजनीतिक सफर 21 साल की उम्र में साल 1976 में महिला कांग्रेस महासचिव पद से शुरू हुआ था। साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरीं ममता ने माकपा के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को पटखनी देते हुए जोरदार धमाके के साथ अपनी संसदीय पारी शुरू की थी। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान उनको युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।
कांग्रेस-विरोधी लहर में साल 1989 में वह लोकसभा चुनाव हार गईं। लेकिन ममता ने हताश होने की बजाय अपना पूरा ध्यान बंगाल की राजनीति पर केंद्रित कर लिया। साल 1991 के चुनाव में वह लोकसभा के लिए दोबारा चुनी गईं। इसके बाद हर लोकसभा चुनाव में वह लगातार जीतती रहीं।