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भाजपा के खिलाफ गठजोड़ के 'ममता फॉर्मूला' ने फिर दिखाया असर

Wed, 07 Nov 2018 02:43 AM IST
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
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अलग अलग राज्यों के अग्रणी क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस के गठबंधन के ममता बनर्जी के फॉर्मूले ने एक बार फिर असर दिखाया है। उत्तर प्रदेश में कैराना, गोरखपुर और फूलपुर में विपक्षी गठबंधन की सफलता के बाद कर्नाटक लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में जदएस-कांग्रेस गठजोड़ ने भाजपा को पटकनी दे कर 2019 की विपक्ष की रणनीति को खासी धार दी है। 

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ विपक्ष के गठबंधन के लिए सीधा सपाट फॉर्मूला दिया था कि जो क्षेत्रीय दल जिस राज्य में मजबूत है कांग्रेस उसके साथ मिलकर चुनाव लड़े। बशर्ते कांग्रेस राज्यों में अगुवा की भूमिका त्यागने को तैयार हो। खासतौर पर कर्नाटक में कांग्रेस ने जदएस की अगुवाई में लड़कर इस प्रयोग की सफलता का संकेत दे दिया है।

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक उपचुनाव के नतीजों ने दूसरे राज्यों के लिए भी गठबंधन का रास्ता खोल दिया है। कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक असम में कांग्रेस इत्र व्यापारी बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ हाथ मिला सकती है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में टीएमसी-कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी)-कांग्रेस, तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस की चुनावी खिचड़ी पकनी शुरू हो चुकी है। 

इसी तरह महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में एनसीपी और कांग्रेस हाथ मिला कर भाजपा को टक्कर दे सकते हैं। बिहार में आरजेडी-कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-कांग्रेस का गठजोड़ काम करेगा। सूत्रों के मुताबिक ऐसे बड़े राज्यों में यदि यह विपक्षी गठबंधन काम कर जाता है तो भाजपा के लिए गंभीर मुसीबत खड़ी हो सकती है। 
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सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के शिमोगा में भी पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बेटे ने लिंगायत की बहुलता की वजह से ही सीट जीती है। येदियुरप्पा लिंगायत के एकमात्र बड़े नेता माने जाते हैं। अगर यहां येदियुरप्पा नहीं होते तो भाजपा को यह सीट भी निकालना भारी पड़ सकता था। 

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि भाजपा के लिए यह सबक है कि उनके खिलाफ गठबंधन की रणनीति काम कर रही है। कर्नाटक लोकसभा और विधानसभा चुनाव के 3-1 के नतीजे विराट कोहली की टीम की जीत की तरह है।
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