प्राचीन इतिहासकार रॉबर्ट अल्टर ने इसके लिए दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इसमें बताया गया था कि बुद्ध के उपासक पैनल को 1970 के दशक में चंदवारम साइट संग्रहालय के पास से स्तूप से खोला गया था। 2001 में इसे संग्रहालय से चुराया गया था। इसके सबूत जर्नल फॉर आर्ट मार्केट स्टडीज में प्रकाशित एक पेपर में मिले जिसमें बताया गया है कि इसे भारत से अवैध रूप से निर्यात करके लाया गया था।
बुद्ध पैनल की सुरक्षा को लेकर मंत्रालय की चिंता अकारण नहीं है। आंध्र प्रदेश में 2000 से 2001 के बीच चंदवारम साइट संग्रहालय से कुल नौ कलाकृतियां चुराई गई थीं। इसमें से चार पुरातन कलाकृतियों को बरामद करा लिया गया है। विडंबना यह है कि आंध्र प्रदेश को पुरातत्व महत्व की कलाकृतियों की चोरी का स्वर्ग माना जाता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से 2014 के बीच प्राचीन वस्तुओं और कला खजाना अधिननियम 1972 के तहत 250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें लगभग दो तिहाई आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से हुईं थी।
दक्षिण राज्यों में 2017 में अंतिम चोरी हुई थी । इसमें 11वीं और 12वीं शताब्दी के नंदी के पत्थर की मूर्ति को आंध्र प्रदेश के चितूर जिले के गुडिमलम में श्री अनादावल्ली अम्मावरु मंदिर से चुराया गया था। इससे पहले 2008 में भी बड़ी चोरी हुई थी।
लगातार हो रही चोरियों की वजह से बदहाल आंध्र प्रदेश पुरातत्व और संग्रहालय विभाग ने व्यवस्था को सुधारने की कवायद शुरू की है। विभाग राज्य के संग्रहालयों के डिजिटल भंडार बनाने की प्रक्रिया में है। इससे संग्रहालयों को दोहरा लाभ होगा। तकनीक का लाभ लोगों को मिलेगा और प्रभावी प्रबंधन से सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा।
इसमें पहले चरण में विजयवाड़ा, गुंटूर, नेल्लोर, कुरनूल, काकीनाडा और राजमेंद्रम के संग्रहालयों में कलाकृतियों और प्राचीन पांडुलिपियों समेत सारे संग्रहों को थ्रीडी प्रारूप में डिजिटलाइज किया जाएगा और सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा ऑनलाइन सिस्टम की मदद से संग्रहालयों की निगेहबानी आसानी से की जा सकेगी।