नोटबंदी के फैसले के बाद आठवें दिन भी ज्यादातर लोगों की जेबें ठंडी ही रहीं लेकिन संसद के अंदर और बाहर नकदी संकट की चर्चा गरम रही। पश्चिम बंगाल में तृणमूल सांसद का निधन होने की वजह से लोकसभा दिनभर के लिए स्थगित रही। लेकिन राज्यसभा हंगामेदार रही।
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही बसपा, सपा, जद (यू), माकपा और तृणमूल समेत तमाम विपक्षी सदस्य सरकार को कोस रहे थे और सरकार उनके सवालों का जवाब देकर उनका गुस्सा शांत करने की कोशिश करती रही। विपक्ष ने इसे आर्थिक आपातकाल करार देते हुए आरोप लगाया कि नोटबंदी की घोषणा से पहले चुनिंदा लोगों में सूचना लीक कराई गई, इसकी जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से होनी चाहिए।
सरकार ने विपक्ष के आरोप को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इस फैसले की 8 नवंबर को अचानक हुई घोषणा से हर कोई हतप्रभ है और यही सबकी ‘मूल’ समस्या है। सत्ता पक्ष से ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘इसमें कोई राजनीति नहीं हुई है। यह राष्ट्रहित में किया गया फैसला है और इससे आने वाले दिनों में देश को फायदा होगा। आम आदमी इसका स्वागत कर रहा है क्योंकि इस फैसले से रिश्वतखोरी और आतंक पर अंकुश लगेगा।’
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गोयल ने दावा किया कि पूरा देश मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर रहा है और यह स्वाभाविक भी है क्योंकि कालेधन और भ्रष्टाचार में लिप्त चंद लोग ही इस कदम से हताश हैं। उन्होंने कहा, ‘ईमानदारी से कमाए गए धन में कोई कटौती नहीं हुई है इसलिए किसी को कोई समस्या नहीं है। नुकसान उन लोगों का हुआ है जिन्होंने भ्रष्टाचार और कालेधन से अकूत दौलत जुटाई है।’
राज्यसभा में कांग्रेस ने मोदी सरकार पर नोटबंदी को लेकर घोटाले का आरोप लगाया। वहीं मायावती ने भी प्रधानमंत्री पर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जेपीसी की जांच की मांग की।
सदन में बहस की शुरुआत ही कांग्रेस और भाजपा में तीखी नोकझोंक से हुई।
आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के इस फैसले से देश में नकदी संकट खड़ा हो गया है। खासकर छोटे दुकानदार, किसान और मजदूरों के लिए संकट बहुत बड़ा है। सरकार ने सभी को अपराधी बना दिया। भारत को कालाबाजारियों का देश बना दिया गया है। पीएम कह रहे हैं कि उनकी जान को खतरा है। सरकार को बताना चाहिए कि उन्हें किस संगठन, व्यक्ति से खतरा है। यह बहुत गंभीर बात है। उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले काला धन रखने वालों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए।
नोटबंदी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी यूनियनों को फैसला लीक किया गया। अमर उजाला समेत कई अखबारों का नाम लेते हुए शर्मा ने कहा कि इन अखबारों में पहले ही नोटबंदी की खबर लीक हो गई थी (हालांकि यह खबर अमर उजाला में नहीं बल्कि किसी अन्य अखबार में छपी थी)।
शर्मा ने कहा कि बैंक से कैश निकासी पर रोक क्यों है? नोटबंदी से बेटियों की शादियां तक रुकी हुई हैं। गरीब की लाश अस्पतालों में फंसी है, बीजेपी ने घाव दिए और घाव पर नमक भी लगाया। मजदूर, किसान नोटबंदी से बेकार हुए। क्या गाजीपुर की रैली का भुगतान क्रेडिट कार्ड से हुआ।
एसबीआई को मार्च से नोट बंद होने की जानकारी थी। काले धन की सूची सार्वजनिक करने को लेकर गोयल ने कहा कि सरकार ये सूची सुप्रीम कोर्ट को देगी। जनता के बीच सार्वजनिक कर वे काले धन रखने वालों को बचने का मौका नहीं देगी।