चंद्रबाबू नायडू निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले गैर-एनडीए दलों की एकता प्रदर्शित करने की दिशा में 'दिल्ली दंगल' अहम होगा। यही वजह है कि इसे लेकर ममता बैनर्जी खुद रणनीति तैयार कर रही हैं। विपक्ष के जो नेता किसी वजह से ममता के साथ थोड़ी-बहुत दूरी रखते हैं, उन्हें मनाने की जिम्मेदारी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सौंपी गई है।
दिल्ली दंगल' में मायावती भी शामिल हों, इसके लिए वे बसपा सुप्रीमो से बातचीत करेंगे। साथ ही नायडू अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मिलकर उन्हें दिल्ली दंगल का न्यौता देंगे। कई विपक्षी नेताओं को यह लग रहा है कि ममता बनर्जी खुद को विपक्ष का ‘केंद्र’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। चंद्रबाबू नायडू के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे उन नेताओं को अपने साथ कैसे लेकर आते हैं जो ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर परेशान हैं।
क्षेत्रीय नेताओं में एक तरह का डर है कि अगर ममता के साथ ऐसा हो गया है तो कल को वे भी भाजपा का निशाना बन सकते हैं। यह बात भी देखने को मिल रही है कि छोटे दल राहुल गांधी की अपेक्षा ख़ुद को ममता बनर्जी के साथ खड़े होने में ज़्यादा आरामदायक समझते हैं।
जांच एजेंसियों की मार विपक्ष को कर रही है एकजुट
कोलकाता रैली और उसके बाद सीबीआई छापे को लेकर हुए धरने-प्रदर्शन में दीदी के मंच पर विराजमान रहे विपक्षी दलों के अधिकांश नेता जांच एजेंसियों की मार झेल रहे हैं। कुछ नेता जांच एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं तो अन्य को लोकसभा चुनाव से पहले जांच में शामिल होना पड़ सकता है।
भाजपा तो कई बार सार्वजनिक तौर से यह बात कह चुकी है कि विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल कई दलों के नेता किसी न किसी जांच एजेंसी के सवालों का सामना कर रहे हैं। कोलकाता रैली की संयोजक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ भी पेंटिंग और चिट फंड मामले को लेकर सीबीआई जांच चल रही है।
हालांकि ममता बैनर्जी ने आंधप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तर्ज पर सीबीआई को अपने राज्य में दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत जांच करने की अनुमति देने वाली सहमति वापस ले ली है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ भी कथित माइनिंग घोटाले में जांच एजेंसी किसी भी वक्त दस्तक दे सकती है।
राजद अध्यक्ष लालू यादव पहले से ही जेल में बंद हैं। अब तेजस्वी यादव और उनकी बहन मीसा भारती प्रवर्तन निदेशालय के रडॉर पर हैं। डीएमके नेता एमके स्टालिन भी कई विवादों में घिरे रहे हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ जांच एजेंसी अपने घोड़े दौड़ा चुकी हैं। उनकी पार्टी के छगन भुजबल और समीर भुजबल के खिलाफ ईडी की जांच चल रही है। धनंजय मुंडे भी टारगेट पर रहे हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि उनके मंत्रियों के घर-दफ़्तर तक को सीबीआई खंगाल चुकी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी पर भी कथित माइनिंग स्कैम के आरोप लगे थे।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झामुमो प्रमुख हेमंत सोरेन का नाम भी जमीन विवाद और ईसीआई के नियमों का उल्लंघन करने में सामने आ चुका है।असम से एआईडीयूएफ के प्रमुख और सांसद बदरुद्दीन अजमल भी कई मामलों में विवादित रहे हैं।ये सभी नेता दिल्ली दंगल में शामिल होंगे।