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केरल में चुनाव प्रचार कर खोलूंगी गठजोड़ की कलई: ममता बनर्जी

Sun, 06 Mar 2016 07:40 AM IST
रीता तिवारी/अमर उजाला, कोलकाता

सार

  • तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी शुरू से ही इस गठजोड़ को अनैतिक करार देती रही हैं।
  • अनैतिक गठजोड़ की कलई उतारने के लिए केरल जाकर चुनाव प्रचार करने की भी बात कही है।
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ममता बनर्जी
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के एलान के बाद कांग्रेस व वामपंथी दलों के बीच प्रस्तावित गठजोड़ को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें लगातार गहरी होती जा रही हैं।
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तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी शुरू से ही इस गठजोड़ को अनैतिक करार देती रही हैं। अब उन्होंने इस अनैतिक गठजोड़ की कलई उतारने के लिए केरल जाकर चुनाव प्रचार करने की भी बात कही है। वह इस गठजोड़ के खिलाफ तमाम हथकंडे अपना रही हैं। 

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद गठजोड़ के मुद्दे पर कांग्रेस व वामपंथी शिविरों की सक्रियता भी बढ़ गई है। दोनों दलों के नेता चाहते हैं कि औपचारिक गठजोड़ के बाद जल्दी ही उम्मीदवारों की सूची जारी हो, ताकि चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
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ममता ने कहा है कि इस गठजोड़ से नाराज या असंतुष्ट लोग अगर उनकी पार्टी में शामिल होना चाहें, तो उनका भी स्वागत किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस के कई विधायक और माकपा के पूर्व मंत्री अब्दुर रज्जाक मौल्ला समेत कई नेता तृणमूल में शामिल हो चुके हैं। ममता ने दूसरे दलों से आने वाले तमाम नेताओं को भी विधानसभा का टिकट दिया है।

ममता की दलील है कि कांग्रेस शुरू से ही बंगाल में माकपा की बी टीम के तौर पर काम करती रही है। अब ये दोनों पार्टियां भले औपचारिक तौर पर अपने गठजोड़ का एलान नहीं करें, लेकिन दोनों के बीच अनैतिक तालमेल तो बहुत पुराना है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों दलों के गठजोड़ से तृणमूल की जीत की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

गठजोड़ को लेकर कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि तालमेल के तहत 90 सीटें मिलने की स्थिति में भी गठजोड़ पर मुहर लग सकती है। उधर, माकपा के एक नेता ने कहा कि वह 75 सीटें कांग्रेस को देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पांच और सीटें छोड़ने पर विचार किया जा सकता है।

शारदा चिटफंड घोटाले के आरोपी मदन मित्रा को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परगना जिले के कमरहाटी सीट से टिकट दे दिया है। हालांकि, मदन मित्रा अभी जेल में हैं, लेकिन ममता ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करते हुए कहा कि मदन विधायक थे और विधायक रहेंगे।
शारदा चिटफंड घोटाले के आरोप में मदन को 12 दिसंबर, 2014 को गिरफ्तार किया गया था।

तमाम कोशिशों के बावजूद कोलकाता हाईकोर्ट समेत बाकी अदालतों ने भी उनकी जमानत अर्जियां ठुकरा दीं। अब अगर मदन को मतदान से पहले जमानत नहीं मिली, तो वह अपना वोट नहीं डाल पाएंगे। अगर वह जेल में रहते हुए चुनाव जीतते हैं, तो वह एक नया रिकॉर्ड बनाएंगे।

हालांकि, उनसे पहले भी कई नेताओं ने जेल में रहकर चुनाव लड़ा था लेकिन उनको निराशा ही हाथ लगी थी। ममता ने कहा कि अगर मदन असल में दोषी हैं, तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन बिना सबूत के 15 महीनों तक जेल में रखने का क्या मतलब बनता है।
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