पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ठीक बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अमेरिका का रुख करेंगी। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन को सबसे पहले बधाई देने वाली मुख्यमंत्री वे ही थीं।
उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण कुछ व्यापारी संगठनों, बौद्धिक संगठनों और अमेरिकी थिंक टैंकों ने दिया है। इसीलिए ममता ने अमेरिका जाने का फैसला किया है यदि वे तीसरी बार भी निर्वाचित होती हैं तो।
इससे पहले भी उन्हें अमेरिका जाने के कई बार निमंत्रण मिले। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते उन्होंने अमेरिका यात्रा से साफ इनकार कर दिया। ममता के करीबी सूत्रों के अनुसार, वे डोनाल्ड ट्रंप को घोर दक्षिणपंथी नीतियों की वजह से उन्हें नापसंद करती थीं। इनमें उनकी आव्रजन नीति, एच-1बी वीजा की संख्या घटाना, शरणार्थियों के प्रवेश पर रोक, श्वेत लोगों का पक्ष लेना और सबसे महत्वपूर्ण, उनका मुस्लिम विरोध था। चूंकि जो बाइडेन इन सभी नीतियों का विरोध करते हैं इसीलिए जैसे ही पेनसिल्वेनिया राज्य के नतीजे आए, ममता ने रात में ही फोन कर जो बाइडेन को राष्ट्रपति चुनाव जीतने की बधाई दी।
वेटिकन, ब्रिटेन को हां, अमेरिका को ना
ऐसा नहीं कि पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने विदेश यात्राएं नहीं की। पिछले 4 सालों के दौरान ही वे ब्रिटेन और वेटिकन की यात्रा पर गई, लेकिन अमेरिका जाने से लगातार इनकार करती रहीं।
निशाना है विधानसभा चुनाव
ऐसा कर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक और अमेरिका-विरोधी मतदाताओं को लुभाना चाहती हैं।