पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संवैधानिक धर्म लांघने का आरोप लगाया है। दरअसल सीएम ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह राज्य प्रशासन के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस दौरान सीएम ने राज्यपाल से कहा कि वह फैसला करें कि संवैधानिक धर्म की सीमा रेखा किसने लांघी है।
ममता बनर्जी ने राज्यपाल को सात पन्ने का एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि धनखड़ भूल गए हैं कि वह : ममता: ‘‘एक गौरवशाली भारतीय राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं’’ जबकि वह नियुक्त किए गए हैं।
सीएम बनर्जी ने पत्र में कहा, ‘‘यह आपको फैसला करना है कि किसने संवैधानिक धर्म का उल्लंघन किया है और संवैधानिक पदाधिकारियों में किसने मर्यादा के मूल नियमों को लांघा है।’’
इससे पहले ममता सरकार ने आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के पालन को लेकर हलफनामा दाखिल किया। राज्य सरकार ने कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने को लेकर पश्चिम बंगाल में आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ के नियमों का पालन नहीं किये जाने के आरोप वाली एक जनहित याचिका के सिलसिले में बृहस्पतिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया।
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने इस याचिका पर राज्य सरकार से हलफनामा तलब किया था। हालांकि, इस दौरान राज्य सरकार के अनुरोध पर बेंच ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई 28 अप्रैल तक स्थगित कर दी। अदालत ने याचिकाकर्ता को सुनवाई की अगली तारीख पर राज्य की स्थिति पर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने की छूट दी।
खंडपीठ ने 17 अप्रैल को राज्य सरकार को उसके तरफ से मांगी गई सूचना सुनवाई की अगली तारीख पर हलफनामे के माध्यम से देने का निर्देश दिया था।