पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पांचवें दौर में सबकी निगाहें महानगर की भवानीपुर सीट पर टिकी हैं। यहां मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं। वाममोर्चा-कांग्रेस गठजोड़ ने उनके खिलाफ बोउदी यानी कांग्रेस की दीपा दासमुंशी को मैदान में उतारा है तो भाजपा ने दादा यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस को।
दो लाख से ज्यादा वोटरों वाला भवानीपुर मिली-जुली आबादी वाला इलाका है। यह इलाका नेताजी के अलावा जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और महान फिल्मकार सत्यजित रे का भी घर रहा है। इस सीट पर 11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दक्षिण कोलकाता को ममता का गढ़ माना जाता है। वे वर्ष 1991 से ही इस सीट पर लोकसभा चुनाव जीतती रही हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने उपचुनाव में भारी अंतर से भवानीपुर सीट जीती थी। ममता भी इसी इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी हैं।
विपक्ष ने इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गठजोड़ की ओर से जहां राहुल गांधी और बुद्धदेव भट्टाचार्य समेत तमाम दिग्गज नेता यहां प्रचार कर चुके हैं, वहीं भाजपा प्रमुख अमित शाह ने भी बुधवार को इलाके में एक रैली को संबोधित किया। बीते लोकसभा चुनावों औरर कोलकाता नगर निगम चुनाव में भाजपा को भवानीपुर सीट पर कोई डेढ़ सौ वोटों की बढ़त हासिल थी। लेकिन तृणमूल खेमा इससे चिंतित नहीं है। इलाके में ममता के रोड शो में उमड़ने वाली भीड़ उनकी लोकप्रियता का सबूत है।
दूसरी ओर, दीपा इस मुकाबले को लेकर चिंतित नहीं हैं। खुद को भवानीपुर की बेटी कहने वाली दीपा कहती हैं कि इलाके में जन्मी व पली-बढ़ी होने की वजह से वे लोगों की समस्याओं और उम्मीदों से अवगत हैं। उनको उम्मीद है कि गठजोड़ के समर्थन के चलते वे इस मुश्किल लड़ाई में जीत जाएंगी।
दूसरी ओर, भाजपा के चंद्र कुमार बोस इस लड़ाई में अब तक तीसरे नंबर पर ही नजर आ रहे हैं। वे रोड शो और घर-घर जाकर प्रचार के जरिए वोटरों से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नेताजी की विरासत के सहारे मैदान में उतरे बोस के लिए यह लड़ाई आसान नहीं है।
उन्होंने भी राज्य में भ्रष्टाचार को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। बीते लोकसभा चुनावों में भाजपा को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 47 हजार से ज्यादा वोट मिले थे जबकि कांग्रेस व माकपा को सात और 30 हजार वोट। अबकी कांग्रेस-वाम गठजोड़ को भाजपा के उन वोटों में सेंध लगाने की उम्मीद है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि दीदी को यहां प्रचार की कोई जरूरत ही नहीं है। वे भारी अंतर से जीतेंगी। उनके सामने विपक्षी उम्मीदवारों का टिकना मुश्किल है।