पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच योजनाओं से संबंधित बकाए के निपटारे को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा शासित केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय योजनाओं का बकाया पश्चिमबंगाल के लिए रोक रही है। वहीं केंद्र सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में केंद्रीय योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसी विवाद के बीच, बीते शनिवार को ममता बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मैंने पत्र लिखकर पीएम मोदी से मिलने का समय मांगा है।
वहीं रविवार को अलीपुरद्वार में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की वजह से कई लोगों सामाजिक कल्याण योजनाओं से वंचित रह गए हैं। अगर केंद्र समय पर राज्य को बकाया चुका देता तो हम ज्यादा लोगों को सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ पाते, लेकिन ऐसा हो न सका।
सभा में ममता बनर्जी ने कहा कि हमारी सरकार चाय बागान श्रमिकों, आदिवासियों और मजदूरों सहित समाज के सभी वर्गों के साथ खड़ी है। मैं हमेशा अपना वादा निभाती हूं। दुख यह है कि केंद्र ने समय पर हमे बकाया नहीं दिया, जिसके कारण लोगों को अधिक लाभ नहीं मिल पाया है। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 93 करोड़ रुपये की 70 परियोजनाओं की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल का बकाया विभिन्न खातों में लंबित है, जिसमें मनरेगा के तहत 100 दिनों का काम, आवास और जीएसटी संग्रह में राज्य का हिस्सा शामिल है। केंद्र पर कुल बकाया राशि 1.15 लाख करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों को एसटी प्रमाण पत्र, स्वच्छ पेयजल और सामाजिक योजनाओं तक पहुंच के संबंध में उनकी चिंताओं को दूर करने का भी आश्वासन दिया।