पश्चिम बंगाल में मूर्ति विसर्जन और मुहर्रम का समय निर्धारित करने के फैसले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई है। वहीं ममता ने कहा कि जब मैं दुर्गा पूजा और गणेश उत्सव के समारोह में जाकर उनका शुभारंभ करती हूं तो मुझ पर तुष्टिकरण का आरोप नहीं लगता है, लेकिन जब मैं ईद की नमाज में शिरकत करती हूं तो मुझ पर इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ममता बनर्जी ने यह बातें पॉम एवेन्यू स्थित एक पूजा पंडाल के शुभारंभ के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहीं। उन्होंने आगे कहा कि अगर ये तुष्टिकरण है तो मैं जब तक जिंदा हूं ऐसा करती रहूंगी।
उन्होंने कहा कि मैं तब भी ऐसा करूंगी जब मेरे सिर पर बंदूक रख दी जाएगी। ममता बनर्जी ने कहा कि मैं भेदभाव नहीं करती, यह बंगाल की संस्कृति है, यह मेरी संस्कृति है। बंगाल में बीजेपी और दक्षिणपंथी समूह ममता पर आरोप लगाते रहे हैं कि वो बंगाल में मुसलमानों को खुश करने के लिए इस तरह के फैसले लिया करती हैं।
जानिए कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा-
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन पर लगी पाबंदी के मुद्दे पर कोलकाता हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को लताड़ लगाते हुए सवाल किया कि आखिर दोनों तबके के लोग एक साथ अपना त्योहार क्यों नहीं मना सकते? ध्यान रहे कि सरकार ने एक अक्तूबर को मुहर्रम होने की वजह से उस दिन प्रतिमाओं के विसर्जन पर पाबंदी लगा दी है।
पहले दशमी के दिन शाम छह बजे तक ही विसर्जन की अनुमति थी। लेकिन अदालती हस्तक्षेप के बाद सरकार ने इसे बढ़ा कर रात दस बजे कर दिया था। सरकार के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की।