अब जल्द ही पश्चिम बंगाल को केवल बंगाल कहा जा सकता है, जबकि बांग्ला भाषा में इसे ‘बांग्ला’ या बॉन्गो बोला जाएगा। मंगलवार को राज्य सरकार की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
राज्य मंत्री पार्था चटर्जी ने कहा कि इस आशय प्रस्ताव पास करने के लिए 26 अगस्त को असेंबली का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
ओडिशा, मुंबई, और चेन्नई जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए चटर्जी ने कहा कि बंगाल शब्द का राज्य की संस्कृति और विरासत के साथ गहरा संबंध है और इसलिए इसे बदलने का निर्णय लिया गया है।
नाम बदलने का अन्य कारण सभी राज्यों की बैठक में पश्चिम बंगाल का नाम वर्णमाला सूची के आधार पर सबसे अंतिम में आता है।
मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री को सबसे अंतिम में बोलने का और सबसे कम समय मिलता है। हालांकि राज्य के नाम में किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।
राज्य सरकार के इस निर्णय का साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय, दादा साहब फालके पुरस्कार विजेता सौमित्र चटर्जी, कवि एनएन चक्रबर्ती ने स्वागत किया है।