पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने एक और सांसद को देखा है, जो फिल्म पृष्ठभूमि से आती हैं। वह उनका सम्मान करती हैं। वह सांसद भाजपा नेता से मिलने और इस्तीफा देने के लिए गई हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि वह सभी को बताना चाहती हैं कि उस सांसद ने पहले ही ईमेल के जरिये इसकी जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा कि वह उनका धन्यवाद करती हैं कि आज वह खुद जाकर मिलीं।
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दबाव में पार्टी छोड़ने का लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने कहा कि जो लोग भाजपा, पुलिस या अदालत के मामलों, ईडी, सीबीआई और सीआईडी मामलों के दबाव में जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई से पहले लोग अपने फैसले के अनुसार कहीं भी जा सकते हैं।
ममता बनर्जी ने कहा, 13 लोगों को छोड़कर करीब 150 लोगों की पुलिस गोलीबारी में मौत हुई। इसके अलावा, कई शहीद परिवार हैं। चुनाव के बाद करीब 20 से 22 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों की हत्या की गई, उन्हें प्रताड़ित किया गया, घरों में आग लगाई गई और दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि इन लोगों के पास अपनी बात रखने का तरीका नहीं था, इसलिए वे विरोध नहीं कर सके।
प्रशासन से निष्पक्ष रहने की अपील की
ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी अपनी क्षमता के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा में प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि कई जगहों पर पुलिस उन्हें जाने से रोक रही है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वह निष्पक्ष रहने का प्रयास करे।
ममता बनर्जी ने कहा कि कौन उनके साथ आएगा या नहीं आएगा, उन्हें इसकी परवाह नहीं है। जो लोग साथ रहेंगे, वे एक नई राह बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर वह 1997 में नया रास्ता बना सकती थीं, तो 2026 में भी ऐसा कर सकती हैं।
26 दिनों के अनशन का जिक्र कर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े। उन्होंने दावा किया कि आम लोग, अर्थशास्त्री और समाज से जुड़े लोग भी देश की स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि जब उन्होंने 26 दिनों तक अनशन किया था, तब सरकार की ओर से कोई उनसे बात करने नहीं आया था। उस समय केवल राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी उनसे मिलने आए थे।