केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पर गुरुवार को हमला करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि फूट डालो और राज करो की राजनीति देश का भला नहीं करेगी, यह समय बीमार अर्थव्यवस्था को संभालने का है।
देश वर्तमान में आर्थिक मंदी का सामना कर रही है। कोलकाता में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि यह समय हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर चोट करने के बजाय, देश को आर्थिक संकट से उबारने का समय है। उन्होंने कहा, बेरोजगारी और गरीबी उच्च स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे समय में मुझे नहीं पता कि हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बीन बजाने से कोई सकारात्मक परिणाम मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कोई नहीं जानता कि कल बैंकों का क्या होगा। हर जगह अनिश्चितता का माहौल है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
आइए हम शांति, समृद्धि और एकता के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक मामलों पर काम करने से वांछित परिणाम नहीं आएंगे।
ममता ने यह भी दावा किया कि देश के उद्योगपति केंद्रीय एजेंसियों- सीबीआई, आईटी विभाग और ईडी से भयभीत महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, उनमें से कई ने इस (धमकी) के कारण भारत को छोड़ दिया है। राहुल बजाज को बोलने की हिम्मत थी, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें तब से निगरानी में रखा गया है।
वयोवृद्ध उद्योगपति राहुल बजाज ने हाल ही में कहा था कि भारतीय उद्योगपति केंद्र की नीतियों की आलोचना करने से डरता था। उन्हें बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजुमदार शॉ का समर्थन मिला, जिन्होंने कहा था कि सरकार भारतीय उद्योगपतियो को 'अछूत' मानती है और अर्थव्यवस्था की कोई आलोचना नहीं सुनना चाहती है।
बिलों की मंजूरी में कथित देरी पर ममता ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में समानांतर प्रशासन चल रहा है। उन्होंने कहा, मुझे यह कहते हुए खेद है, सदन स्थगित हो गया क्योंकि बिलों पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। हम लड़ रहे हैं, और हम इसका मुकाबला करेंगे।