विश्व भारती विश्वविद्यालय की शुरुआत एक आश्रम के तौर पर रवींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में सात एकड़ जमीन पर एक आश्रम के तौर पर की थी। जहां 1901 में रवींद्रनाथ टैगोर ने पांच छात्रों के साथ विश्वविद्यालय स्थापित किया और इसे विज्ञान के साथ कला और संस्कृति की पढ़ाई का उत्कृष्ट केंद्र बनाया।
1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और वर्तमान में यहां छह हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। विश्व भारती देश की सबसे पुरानी केंद्रीय यूनिवर्सिटी है। मई 1951 में संसद के एक अधिनियम द्वारा विश्व-भारती को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का एक संस्थान घोषित किया गया था।
केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित इस विश्वविद्यालय से 10 उप-संस्थान भी संबद्ध हैं जो उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध हैं। विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। यहां के पुस्तकालय में दुनियाभर की किताबें मौजूद हैं।
शांतिनिकेतन में स्थित इस विश्वविद्यालय को अपने शांत और प्राकृतिक वातावरण के लिए भी जाना जाता है। यहां आने वाले लोग यहां के खान-पान के भी मुरीद हैं। यहां की प्राकृतिक छटा मनमोहक है और यह विश्वविद्यालय दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है।