विपक्षी दलों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनसे मिलने के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दौरा कर सकती हैं। ब्रिटेन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी और अदाणी के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच संसद में टकराव के बाद यह कदम उठाया गया है।
तृणमूल कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने बताया कि पार्टी प्रमुख के दिल्ली के दौरे पर जाने की संभावना है। उन्होंने कहा, कार्यक्रम को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। लेकिन संभावना है कि वह मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में दिल्ली में होंगी। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के साथ टीएमसी प्रमुख की बैठक की संभावना नहीं है।
सूत्रों ने कहा, राष्ट्रीय राजधानी में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख की जिन लोगों से मुलाकात होने की संभावना है, उनमें वे राजनीतिक दल भी शामिल हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित पत्र भेजा है। ममता बनर्जी पत्र लिखने वाले विपक्षी नेताओं के बीच हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक थीं।
इन नेताओं में बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव, जेकेएनसी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, एआईटीसी प्रमुख ममता बनर्जी, राकांपा प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, राजद नेता तेजस्वी यादव और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव शामिल हैं। हालांकि, पत्र में कांग्रेस, जेडीएस, जेडीयू और सीपीआई (एम) की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।
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लालू प्रसाद यादव और के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता सहित कई विपक्षी नेता इन एजेंसियों के द्वारा जांच का सामना कर रहे हैं और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के दो मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया इस समय जेल में बंद हैं। ममता बनर्जी आखिरी बार राष्ट्रीय राजधानी आई थीं, जब जी-20 के लिए केंद्र द्वारा सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी।
इससे पहले 5 मार्च को विपक्ष की आवाज को एकजुट करने के प्रयास में आठ राजनीतिक दलों के नौ नेताओं ने आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा था और आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बताता है कि देश लोकतंत्र से निरंकुशता में बदल गया है। हमें उम्मीद है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि भारत अभी भी एक लोकतांत्रिक देश है। नेताओं ने लिखा कि विपक्ष के सदस्यों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का घोर दुरुपयोग यह दर्शाता है कि हम लोकतंत्र से निरंकुशता में बदल गए हैं।