सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में चल रहा अपना धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची संशोधन के संबंध में अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने के आदेश का स्वागत भी किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को दोषपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ अपना धरना पांचवें दिन समाप्त कर दिया। धरना खत्म करने के बाद ममता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची संशोधन के संबंध में अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने के आदेश के बाद विरोध-प्रदर्शन को अस्थायी रूप से स्थगित किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपीलीय प्राधिकरण के गठन के कदम का स्वागत करते हुए बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा बंद किया गया दरवाजा अब खुल गया है, जिससे उन लोगों के लिए आशा की एक नई किरण जगी है जिनके नाम एसआईआर के तहत ‘तार्किक विसंगति’ के कारण हटा दिए गए थे या विचाराधीन थे।
धरनास्थल से ममता ने कहा कि आंदोलन के जरिये उन्हें काफी हद तक न्याय मिला है। जब न्याय का रास्ता खुल गया है तो धरना समाप्त करना उचित है। उन्होंने कहा कि वह जरूरत पड़ने पर 50 दिन भी आंदोलन कर सकती थीं, लेकिन अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद धरना समाप्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने धरनास्थल के आसपास के दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और होटल संचालकों से असुविधा के लिए माफी भी मांगी।
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उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संघर्ष में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। अपने संबोधन में ममता ने सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं संघर्षों से तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा को नई दिशा मिली थी और इतिहास कई बार खुद को दोहराता है। धरना समाप्त करने की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि वह राज्यपाल सीवी आनंद बोस से भी शिष्टाचार मुलाकात करेंगी।