सीबीआई जांच को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार केंद्र सरकार से टकरा चुकी हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जब सीबीआई ने उनके भतीजे और डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा से कोयला घोटाले में पूछताछ शुरू की तो मुख्यमंत्री 'जांच एजेंसी' के हाथ नहीं बांध सकीं। हालांकि पश्चिम बंगाल उन आठ राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने नए मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीते नवंबर में अपने एक फैसले में कहा था, केंद्र सरकार अपनी मर्जी से राज्यों की सहमति के बिना केंद्रीय जांच ब्यूरो का दायरा नहीं बढ़ा सकती है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की कोई भी जांच, केंद्र और संबंधित राज्य की सहमति के बिना शुरू नहीं की जा सकती। सर्वोच्च अदालत का यह फैसला उस वक्त आया था, जब आठ राज्यों ने जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।
उस वक्त विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह जांच एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है। कोई भी चुनी हुई सरकार अगर केंद्र की हां में हां नहीं मिलाती है, तो उसके पीछे केंद्रीय जांच एजेंसियां छोड़ दी जाती हैं। जस्टिस एएम खानविलकर और बीआर गवई की पीठ ने कहा था, कानून के अनुसार, राज्यों की सहमति आवश्यक है और केंद्र, राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकार क्षेत्र नहीं बढ़ा सकता है।
सीबीआई, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6 के तहत काम करती है। इसी आधार पर सीबीआई और विभिन्न राज्यों के बीच सामान्य सहमति होती है। इसके बाद ही सीबीआई किसी मामले की जांच को आगे बढ़ाती है। राज्य सरकार, सामान्य सहमति को वापस ले लेती है तो जांच एजेंसी को उस राज्य में जांच या छापेमारी करने से पहले संबंधित राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।