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कोयला घोटाला: इस बार सीबीआई के हाथ नहीं बांध सकीं ममता बनर्जी, पिछले साल चार मामलों में जांच एजेंसी पर बैठा दिया था पहरा

Tue, 23 Feb 2021 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने बीते नवंबर में अपने एक फैसले में कहा था, केंद्र सरकार अपनी मर्जी से राज्यों की सहमति के बिना केंद्रीय जांच ब्यूरो का दायरा नहीं बढ़ा सकती है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की कोई भी जांच, केंद्र और संबंधित राज्य की सहमति के बिना शुरू नहीं की जा सकती...
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अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सीबीआई जांच को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार केंद्र सरकार से टकरा चुकी हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जब सीबीआई ने उनके भतीजे और डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा से कोयला घोटाले में पूछताछ शुरू की तो मुख्यमंत्री 'जांच एजेंसी' के हाथ नहीं बांध सकीं। हालांकि पश्चिम बंगाल उन आठ राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने नए मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है।

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बाकी राज्यों की सूची में झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और पंजाब का नाम शुमार है। चूंकि कोयला घोटाले की जांच कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है, इसलिए ममता बनर्जी की ओर से वापस ली गई सहमति यहां सीबीआई जांच को नहीं रोक पाने में कारगर साबित नहीं हुई। पिछले साल पश्चिम बंगाल सरकार ने चार मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी को अपनी सहमति नहीं दी थी। पांच वर्ष के दौरान राज्यों की तरफ से 9 मामलों में सीबीआई को जांच करने की अनुमति नहीं मिली। इनमें से अकेले चार मामले पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े हैं।

रविवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कोयला तस्करी मामले में अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा को नोटिस जारी किया था। मंगलवार को जांच एजेंसी ने रुजिरा से पूछताछ की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2018 में केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया था कि वह अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल करती है। इसके बाद राज्य सकरार ने सीबीआई को जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई नए मामलों की जांच करने के लिए जब कदम आगे बढ़ाना चाहा तो पश्चिम बंगाल सरकार ने सहमति वापस लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी के हाथ बांध दिए थे। पिछले साल ममता सरकार ने चार मामलों में सीबीआई को जांच करने से रोका था।
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कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मौजूदा संसद सत्र में बताया था कि केंद्र सरकार के पास सीबीआई द्वारा किसी मामले की जांच के लिए अनिवार्य राज्य सहमति के खंड को वापस लेने की कोई योजना नहीं है। यह सवाल लोकसभा सांसद अदूर प्रकाश ने पूछा था। सीबीआई ने सूचित किया है कि पिछले पांच वर्षों में यानी पहली जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2021 तक की स्थिति के अनुसार, राज्य सरकारों द्वारा 9 मामलों में सीबीआई जांच के लिए सहमति देने से इनकार किया गया है। ॉ

इनमें आंध्र प्रदेश सरकार से संबंधित चार मामले (दो केस 2018 में और 2019 में दो केस) हैं। इन चारों मामलों में आंध्रप्रदेश सरकार ने सीबीआई को जांच के लिए अपनी सहमति देने से मना कर दिया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2020 में एक मामले में अपनी सहमति नहीं दी थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने 2020 में चार मामलों में सीबीआई जांच के लिए अपनी सहमति नहीं दी।

राज्यों की सहमति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये अहम फैसला ...

सुप्रीम कोर्ट ने बीते नवंबर में अपने एक फैसले में कहा था, केंद्र सरकार अपनी मर्जी से राज्यों की सहमति के बिना केंद्रीय जांच ब्यूरो का दायरा नहीं बढ़ा सकती है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की कोई भी जांच, केंद्र और संबंधित राज्य की सहमति के बिना शुरू नहीं की जा सकती। सर्वोच्च अदालत का यह फैसला उस वक्त आया था, जब आठ राज्यों ने जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।

उस वक्त विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह जांच एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है। कोई भी चुनी हुई सरकार अगर केंद्र की हां में हां नहीं मिलाती है, तो उसके पीछे केंद्रीय जांच एजेंसियां छोड़ दी जाती हैं। जस्टिस एएम खानविलकर और बीआर गवई की पीठ ने कहा था, कानून के अनुसार, राज्यों की सहमति आवश्यक है और केंद्र, राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकार क्षेत्र नहीं बढ़ा सकता है।

सीबीआई, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6 के तहत काम करती है। इसी आधार पर सीबीआई और विभिन्न राज्यों के बीच सामान्य सहमति होती है। इसके बाद ही सीबीआई किसी मामले की जांच को आगे बढ़ाती है। राज्य सरकार, सामान्य सहमति को वापस ले लेती है तो जांच एजेंसी को उस राज्य में जांच या छापेमारी करने से पहले संबंधित राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।

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