पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'शहीद दिवस रैली' को संबोधित करते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बंगाल में एसआईआर जैसा कुछ नहीं होने देंगे। भाषाई मुद्दा और बंगाली अस्मिता पर ममता बनर्जी ने 27 जुलाई से भाषा आंदोनल शुरू करने की बात कही, जो विधानसभा के चुनाव के नतीजों तक चलेगा।
कोलकाता के धर्मतला में आयोजित 'शहीद दिवस रैली' में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना तीखा हमला बोला। उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति आपको कंट्रोल कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 1993 में कई युवाओं की मौत की याद में आयोजित रैली को संबोधित किया।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बंगाल में एसआईआर जैसा कुछ नहीं होने देंगे। भाषाई मुद्दा और बंगाली अस्मिता पर ममता बनर्जी ने 27 जुलाई से भाषा आंदोनल शुरू करने की बात कही, जो विधानसभा के चुनाव के नतीजों तक चलेगा। ममता ने कहा कि केंद्र सरकार भाजपा के राज्यों को नोटिस जारी करके कहती है कि बांग्ला बोलने वालों की पहचान करो और जेल में डालो।
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भाषाई मुद्दा और बंगाली अस्मिता
ममता बनर्जी ने भाषाई अस्मिता और बंगाली मजदूरों के साथ हो रहे भेदभाव को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि मैं बंगाली भाषा में बोलती हूं लेकिन किसी और भाषा का अपमान नहीं करती। हमारे राज्य में डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं, लेकिन यहां किसी के साथ ऐसा नहीं होता। फिर बाहर जाकर हमारे मजदूरों के साथ ऐसा क्यों होता है। उन्होंने आगे कहा कि भाषा आंदोलन 27 जुलाई से शुरू होगा, जो विधासनभा के चुनाव के नतीजों तक जारी रहेगा। देखना चाहती हूं कि तुम्हारे पास कितनी ताकत है, कितनी जेल है।
भाजपा वाले बोलेंगे जय बांग्ला
ममता बनर्जी के साथ उनके भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी भाजपा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हम बंगाल के बेटे हैं हम यूपी और बिहार से नहीं आए हैं। हम कभी सरेंडर नहीं करेंगे। धर्म का इस्तेमाल राजनीति में नहीं होना चाहिए।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले भाजपा वाले 'जय श्री राम' कहते थे, लेकिन आज वे 'जय मां दुर्गा', 'जय मां काली' कह रहे हैं। मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए मैं उनसे 'जय बांग्ला' कहलवाऊंगा। 10 महीनों में वे 'जय बांग्ला' कहने लगेंगे। इस बार हम संसद में बंगाली में बोलेंगे। देखते हैं हमें कौन रोकता है। बनर्जी ने कहा कि भाजपा दो 'ई' चला रही है। मतदाताओं पर ईसी और विपक्षी नेताओं पर ईडी ।