मालेगांव विस्फोट मामले में पूर्व एटीएस प्रमुख केपी रघुवंशी के दावों से विवाद बढ़ गया है। उन्होंने अपनी किताब में जांच के दौरान दबाव की बात कही है। इस पर आरएसएस ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बयान के बाद मामले में नई बहस छिड़ गई है और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
2008 मालेगांव विस्फोट मामले को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख केपी रघुवंशी के दावों ने सियासी और संगठनात्मक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। रघुवंशी ने अपनी किताब में जांच के दौरान दबाव की बात कही है, जिस पर अब आरएसएस की प्रतिक्रिया सामने आई है।
विज्ञापन
रघुवंशी ने अपनी जीवनी में दावा किया है कि यूपीए सरकार के दौरान उन पर एक विशेष व्यक्ति को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण उन्होंने गिरफ्तारी से इनकार किया, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। इस दावे ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या था रघुवंशी का दावा?
किताब के अनुसार, रघुवंशी को दिल्ली बुलाकर एक आरएसएस नेता की गिरफ्तारी के लिए कहा गया था। उन्होंने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए यह कदम उठाने से मना कर दिया। इसके बाद उन्हें एटीएस प्रमुख के पद से हटा दिया गया। यह दावा सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।
आरएसएस ने क्या कहा?
आरएसएस के कोंकण क्षेत्र के पदाधिकारी विठ्ठलराव कांबले ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने ज्यादा टिप्पणी करने से भी परहेज किया।
रघुवंशी के दावों के बाद मालेगांव जांच को लेकर फिर बहस तेज हो सकती है। इस मामले में पहले भी कई राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। अब नए दावों के सामने आने से जांच और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर फिर सवाल उठ सकते हैं।