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मालेगांव ब्लास्ट: साध्वी प्रज्ञा समेत सात को बरी करने वाले फैसले को चुनौती, हाईकोर्ट पहुंचे पीड़ित परिवार

Tue, 09 Sep 2025 05:10 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले में मृतकों के परिजन बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने एनआईए अदालत के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, प्रसाद पुरोहित और पांच अन्य को बरी किया गया था। धमाके में छह की मौत और 101 लोग घायल हुए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फैसले में गंभीर खामियां हैं।
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मालेगांव बम विस्फोट मामला - फोटो : ANI
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विस्तार
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मालेगांव ब्लास्ट मामले में मृतकों के छह परिजनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन परिवारों ने विशेष एनआईए अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया गया था। यह अपील सोमवार को निसार अहमद सैयद बिलाल और अन्य ने अपने वकील मतीन शेख के जरिए दाखिल की।
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29 सितंबर 2008 को मालेगांव की एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिल पर बंधा विस्फोटक फट गया था। यह घटना नासिक जिले के साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाके में हुई थी। धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 101 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हलचल मच गई थी।

पीड़ित परिवार की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 31 जुलाई को एनआईए कोर्ट द्वारा दिया गया बरी करने का आदेश गलत और कानून के खिलाफ है। इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए। पीड़ित परिवारों ने दलील दी है कि अदालत ने सबूतों को नजरअंदाज किया और दोषियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
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फैसला सुनाते वक्त क्या बोली थी अदालत?
एनआईए कोर्ट के विशेष जज ए. के. लाहोटी ने अपने फैसले में कहा था कि संदेह को सबूत का स्थान नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसे ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिससे आरोपियों की दोषसिद्धि सुनिश्चित हो सके। इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।

अभियोजन की दलील और जांच पर सवाल
अभियोजन का आरोप था कि धमाके को दक्षिणपंथी उग्रवादियों ने अंजाम दिया था, जिनका उद्देश्य मालेगांव जैसे संवेदनशील शहर में मुस्लिम समुदाय को आतंकित करना था। लेकिन अदालत ने अभियोजन की जांच और केस में कई खामियों की ओर इशारा किया। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत सबूत इतने मजबूत नहीं थे कि दोष सिद्ध किया जा सके।
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कौन-कौन हुआ बरी?
प्रज्ञा ठाकुर और प्रसाद पुरोहित के अलावा मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय रहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी को भी बरी कर दिया गया। अब पीड़ित परिवार हाईकोर्ट से उम्मीद कर रहे हैं कि विशेष अदालत के फैसले की समीक्षा होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।


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