जैसे-जैसे घड़ी की सूई घूम रही है, मालदीव में संकट गहराता जा रहा है। मालदीव की बदल रही स्थिति भारत के लिए नए नासूर के रूप में देखी जा रही है। मालदीव की दिशा में बढ़ते चीन के युद्धपोत ने इसे और पेंचीदा बना दिया है। कूटनीति के जानकारों का कहना है कि मालदीव में भारत विरोधी गतिविधियों के पनपने के आसार बढ़ रहे हैं। ऐसे में मालदीव हिन्द महासागरीय क्षेत्र में भारत के लिए चुभने वाला कांटी बन रहा है।
भारत की स्थिति
मालदीव की भारत के केरल तटों से हवाई दूरी महज तीन घंटे की है। मालदीव समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार के रास्ते में पड़ता है। इस तरह से मालदीव भारत के लिए रणनीतिक रूप में काफी अहम है। भारत लगातार मालदीव के अंदरुनी हालात पर नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मालदीव के ताजा घटनाक्रमों को लेकर शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व लगातार कुछ देशों के भी संपर्क में है।
इसके अलावा हस्तक्षेप पर भी विचार की स्थिति लगातार बनी हुई है। अपने सभी विकल्पों को केन्द्र में रखकर भारत ने वहां की मजलिस द्वारा आपातकाल को 30 दिन तक बढ़ाने की निंदा की है। जिसके बरअक्स भारत लगातार मालदीव से राजनैतिक कैदियों को छोड़ने, संवैधानिक परंपरा में भरोसा करने, मालदीव के नियम कायदे को मानने तथा लोकतंत्रीय प्रणाली पर अमल करने की अपील कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि मालदीव में आपातकाल बढ़ाने का कोई कारण नजर नहीं आता। वहीं मालदीव ने इसे भारत द्वारा तथ्यों को तोड़ मरोड़कर देखने जैसा बताया है। उसका कहना है कि मालदीव इतिहास के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। इस स्थिति में भारत समेत विश्व के सभी सहयोगियों को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे शांति के प्रयासों को झटका लगे। मालदीव के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के इस वक्तव्य से साफ है कि भारत और मालदीव के रिश्ते भी अपने बुरे दौर से गुजर रहे हैं। कुल मिलाकर भारत की रणनीति फिलहाल वेट एंड वॉच की है।
अब्दुल्ला यामीन का रुख
मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चीन समर्थक बताए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थता करने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। माना जा रहा है कि अब्दुल्ला यामीन ने यह कदम चीन के इशारे पर उठाया है। कूटनीतिक गलियारे से प्राप्त खबरों के मुताबिक यामीन को मालदीव में भारत के सैन्य हस्तक्षेप की आशंका सता रही है। अब्दुल्ला यामीन चीन के साथ-साथ पाकिस्तान के भी करीबी बताए जाते हैं।
मालदीव में पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी निवेश है। वहां चीन की कंपनियां काम कर रही है। राष्ट्रपति यामीन संभावित खतरों को भांपकर मालदीव की सेना, पुलिस पर लगतार पकड़ मजबूत कर रहे हैं। वहां की मौजूदा सरकार भारत के खिलाफ माहौल बनाने में लगी है। जबकि पूर्व राष्ट्रपति नशीद समेत अन्य भारत से मदद की गुहार कर रहे हैं।