मलयालम सिनेमा कांड
- फोटो : AMAR UJALA
इन दिनों मलयालम फिल्म उद्योग यानी मॉलीवुड चर्चा में है। मॉलीवुड की महिला कलाकरों के यौन उत्पीड़न के शिकायतों ने तहलका मचा दिया है। मीटू के आरोपों के चलते मलयालम फिल्म उद्योग की दो प्रमुख हस्तियों एक्टर सिद्दीकी और निर्देशक रंजीत ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। अब इस मामले की जांच के लिए केरल सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है। मलयालम सिनेमा उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न और शोषण के मामलों का खुलासा हेमा समिति की रिपोर्ट में हुआ है।
आइये जानते हैं कि हेमा समिति की रिपोर्ट में क्या है? मलयालम सिनेमा में कलाकरों के यौन उत्पीड़न का मामला क्या है? किन हस्तियों पर क्या आरोप लगे हैं? सरकार ने घटना को लेकर क्या कदम उठाया है?
मलयालम सिनेमा कांड
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हेमा समिति क्या है?
मलयालम सिनेमा में यौन उत्पीड़न का मामला भले ही अभी चर्चा में आया हो लेकिन इसकी कहानी कई वर्ष पुरानी है। इस पूरे मामले की जड़ में फरवरी 2017 में एक लोकप्रिय मलयालम अभिनेत्री के साथ घटी घटना है। उस वक्त अभिनेत्री ने कोच्चि में अपने साथ हुए अपहरण और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद केरल पुलिस ने अभिनेता दिलीप पर यौन उत्पीड़न की साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया।
इस घटना से इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। मई 2017 में मलयालम सिनेमा के महिला कलाकारों और तकनीशियनों का एक समूह पीड़ितों का समर्थन में उतर आया। इसके साथ ही मॉलीवुड में महिलाओं के साथ होने वाली लैंगिक असमानता, दुर्व्यवहार और अन्याय को उजागर करने के लिए वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) नाम की एक संस्था बनाई गई। मई महीने में ही डब्ल्यूसीसी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से मुलाकात कर साजिश की जांच और मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मलयालम सिनेमा में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को एक लिखित अपील भी सौंपी।
इसी संस्था की अपील के आधार पर केरल सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. हेमा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इस समिति में पूर्व अभिनेता शारदा और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केबी वलसाला कुमारी भी शामिल की गईं।
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण के लगे आरोप
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अब हेमा समिति की रिपोर्ट में क्या है?
फरवरी 2017 की घटना के बाद बनी हेमा समिति ने इसी 18 अगस्त को मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार को पांच साल पहले ही सौंपी जा चुकी थी। 18 अगस्त को सार्वजनिक हुई 235 पन्ने की रिपोर्ट में कई तरह के गंभीर मामले सामने आए। सिनेमा उद्योग में यौन शोषण, अवैध प्रतिबंध, भेदभाव, नशीली दवाओं और शराब के दुरुपयोग, वेतन असमानता जैसे खतरनाक और गंभीर मामले उजागर हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मलयालम सिनेमा कुछ पुरुष निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं के चंगुल में है।
रिपोर्ट आने के बाद क्या हुआ?
हेमा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से कई महिला कलाकार यौन उत्पीड़न के अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा करने के लिए आगे आई हैं। कई लोगों ने मलयालम सिनेमा के कुछ जाने-माने चेहरों पर आरोप लगाए हैं, जिनमें निर्देशक रंजीत और अभिनेता सिद्दीकी और मुकेश शामिल हैं।
22 अगस्त को केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को समिति की पूरी रिपोर्ट की एक प्रति सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगले दिन एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (एएमएमए) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मसले पर प्रतिक्रिया दी। 23 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एएमएमए के महासचिव और अभिनेता सिद्दीकी ने इन आरोपों से इनकार किया कि एसोसिएशन ने रिपोर्ट के प्रकाशन को रोकने की कोशिश की थी। सिद्दीकी पर एक युवा अभिनेत्री ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
25 अगस्त को हुए कई घटनाक्रमों से मामले ने और तूल पकड़ा। सिद्दीकी ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एएमएमए के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। इसी दिन केरल राज्य चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष रंजीत ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। 2009 में हुई एक घटना के संबंध में यह शिकायत पर दर्ज कराई गई थी। बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने रंजीत पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था।
इन इस्तीफों के बीच 25 अगस्त को ही विपक्ष और फिल्म उद्योग के दबाव में केरल सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। सात सदस्यों वाली समिति को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 (1) के तहत प्रारंभिक जांच करने का काम सौंपा गया जिसमें वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया।
एक के बाद एक मामले दर्ज हुए
26 अगस्त को केरल में एर्नाकुलम उत्तर पुलिस ने एक अभिनेत्री द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अभिनेता रंजीत के खिलाफ गैर-जमानती मामला दर्ज किया। अगले दिन अभिनेता मोहनलाल ने एएमएमए के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही कार्यकारी समिति के सभी सदस्यों ने अपना संयुक्त इस्तीफा सौंप दिया।
पुलिस मामलों का सिलसिला यहीं थमा। 28 अगस्त को तिरुवनंतपुरम में पुलिस ने अभिनेता सिद्दीकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। एक अभिनेत्री ने सिद्दीकी पर 2016 में तिरुवनंतपुरम के एक होटल में कथित तौर पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।
अगले दिन अभिनेता जयसूर्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जयसूर्या पर कई साल पहले एक फिल्म की शूटिंग के दौरान तिरुवनंतपुरम में राज्य सचिवालय में एक महिला कलाकार का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा।
29 अगस्त को ही केरल की कोच्चि सिटी पुलिस ने अभिनेता एम. मुकेश, अभिनेता मनियानपिला राजू, अभिनेता एडावेला बाबू, वी.एस. चंद्रशेखरन और प्रोडक्शन कंट्रोलर नोबल के खिलाफ पांच मामले दर्ज किए। ये मामले अभिनेत्री मीनू मुनीर द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में दर्ज किए गए। एम. मुकेश कोल्लम से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायक भी हैं।
अगले दिन केरल पुलिस ने मलयालम फिल्म अभिनेता जयसूर्या के खिलाफ यौन उत्पीड़न का दूसरा मामला दर्ज किया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम में करमना पुलिस ने एक फिल्म सेट पर जयसूर्या के साथ काम करने वाली एक अभिनेत्री के बयान के आधार पर शुक्रवार (30 अगस्त) को एफआईआर दर्ज की। जयसूर्या पर एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्दों, इशारों और कृत्यों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगे हैं।
अभी क्या हो रहा है?
केरल सरकार की गठित एसआईटी फिलहाल पूरे मसले की जांच कर रही है। विशेष जांच दल शिकायतकर्ता का बयान दर्ज कर रही है। उधर पुलिस भी अब तक अलग-अलग शिकायतों के आधार पर केस दर्ज कर जांच में जुटी है। इस बीच, जाने-माने निर्देशक आशिक अबू ने शुक्रवार को फिल्म कर्मचारी महासंघ केरल (FEFKA) निर्देशक संघ से इस्तीफा दे दिया। अबू ने हेमा समिति की रिपोर्ट पर निर्माताओं के संगठन के पाखंडी रुख की आलोचना की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि FEFKA के महासचिव उन्नीकृष्णन के नेतृत्व में संगठन ने पहले मनमाने ढंग से कलाकारों पर पाबंदी लगाई है।