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भूपेंद्र यादव के स्टाफ में बड़ा बदलाव: पर्यावरण मंत्रालय से क्यों हटाए गए तीन अधिकारी? कांग्रेस ने उठाए सवाल

Tue, 07 Jul 2026 05:15 PM IST
Asmita Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली

सार

पर्यावरण मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव अमर सिंह और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को पद से हटा दिया है। मंत्रालय ने इसे प्रशासनिक निर्णय बताया है। वहीं, कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव। - फोटो : ANI
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विस्तार
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पर्यावरण मंत्रालय ने एक साथ अपने निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटा दिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को प्रशासनिक कारणों से हटा दिया गया। वहीं, एक अतिरिक्त निजी सचिव की नियुक्ति समाप्त कर दी गई। दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को समय से पहले उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया।

आदेश में क्या है?

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यह निर्णय 3 जुलाई को जारी किए गए तीन अलग-अलग आदेशों के माध्यम से घोषित किया गया था। इनमें अधिकारियों को हटाने के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था। जिन निजी सचिवों को उनके पद से मुक्त किया गया है। वे अमर सिंह हैं, जो 2010 बैच के भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी हैं।

मंत्रालय के आदेश के अनुसार, 'पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के निजी सचिव अमर सिंह आईआरएस को प्रशासनिक आधार पर उनके मूल विभाग, यानी राजस्व विभाग में वापस भेज दिया गया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है।' अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सरन का पद समाप्त कर दिया गया है। एक अन्य अतिरिक्त निजी सचिव, शैलेश कुमार सिंह, को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है।

आदेश में कहा गया है,'केंद्रीय सचिवालय सेवा के शैलेश कुमार सिंह, जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव थे। उनको समय से पहले उनके मूल कैडर, यानी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में 'विस्तारित शीतलन अवधि' के प्रावधान के साथ वापस भेज दिया गया है। इन तीनों आदेशों की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग आदि को भी भेजी गईं।

कांग्रेस ने साधा निशाना
इस मामले में कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यादव के चार कर्मचारियों की बर्खास्तगी की खबर चौंकाने वाली है। रमेश ने एक्स पर लिखा,'मोदी शासन में इस तरह की नियुक्तियां कैसे होती हैं। यह कोई रहस्य नहीं है। क्या बिना आग के इतना धुआं हो सकता है? क्या यह प्रधानमंत्री चंदा दो धंधा लो योजना के विफल होने का उदाहरण है?'

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