महाराष्ट्र के बीड जिले के न्यायालय ने बुधवार को पूर्व राज्य मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता धनंजय मुंडे को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने नेता के खिलाफ उनकी पहली पत्नी होने का दावा करने वाली एक महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने आरोप लगाया था कि मुंडे ने 2024 के चुनावी नामांकन पत्रों में आवश्यक जानकारी छिपाई है।
ये भी पढ़े: BMC Election: निगम चुनाव से पहले कांग्रेस गठबंधन पर संकट, सहयोगी वीबीए को 20 सीटों पर उम्मीदवार नहीं मिले
कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?
मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (परली वैजनाथ) दीपक बोरडे ने फैसला सुनाया कि शिकायतकर्ता करुणा मुंडे आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया में कोई मामला साबित नहीं कर पाई हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि तथ्यों को चुनाव जीतने के उद्देश्य से नहीं छिपाया गया था। अदालत ने कहा, "ऐसा लगता है कि शिकायतकर्ता की ओर से बताए गए तथ्यों को छिपाने से उनकी चुनावी जीत पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसलिए ऐसे तथ्य को न बताने का मकसद चुनाव में जीतने का नहीं लगता।"
क्या था मामला?
मामले में करुणा मुंडे ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत अदालत का रुख किया था। उन्होंने खुद को एनसीपी नेता की पहली कानूनी रूप से विवाहित पत्नी बताया था। उनकी मुख्य शिकायत थी कि पहली पत्नी होने के बावजूद, नवंबर 2024 में जब धनंजय मुंडे ने बीड जिले के परली से विधानसभा चुनाव लड़ा, तो नामांकन पत्रों में उनका नाम शामिल नहीं था।
एनसीपी नेता के वकील ने क्या कहा?
दूसरी ओर, एनसीपी नेता ने न्यायालय में कहा कि उनका संबंध आपसी सहमति से था, जिससे दो बच्चे हुए। पूर्व मंत्री ने बच्चों के दस्तावेजों में केवल अपना नाम और उपनाम प्रयोग करने की अनुमति दी थी। धनंजय मुंडे के अधिवक्ता बी. कावड़े ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता को पूरी जानकारी थी कि एनसीपी विधायक पहले से शादीशुदा हैं, फिर भी उन्होंने स्वेच्छा से रिश्ता बनाया, जो नवंबर 2020 में खत्म हो गया।
ये भी पढ़े: Maharashtra Civic Polls: नागपुर में शरद पवार के दल का कांग्रेस से गठबंधन नहीं, NCP बोली- वे गठबंधन नहीं चाहते
कोर्ट ने क्या कहा?
महिला के मामले में कई विसंगतियों को उजागर करते हुए, न्यायालय ने बताया कि शिकायत में 1996 के विवाह का उल्लेख है, जबकि उनके सत्यापन बयान में तिथि 1 सितंबर, 1998 बताई गई है। न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता ने विवाह का कोई कानूनी दस्तावेज जैसे पंजीकरण प्रमाण पत्र या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं, जो यह सिद्ध करें कि वह परली विधायक की पहली कानूनी रूप से विवाहित पत्नी हैं।
अन्य वीडियो-