मिट्टी की नमी में गिरावट आने से लू की घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं। दरअसल, मिट्टी में नमी जब कम होती है, तो वाष्पीकरण घट जाता है। इससे वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है। ग्राज और रीडिंग विवि के शोधकर्ताओं के ताजा अध्ययन से पता चला है कि पूर्वी उत्तरी अमेरिका और मध्य यूरोप में मिट्टी की नमी में आए बदलाव से लू की घटनाएं पिछले अनुमान से दोगुनी तीव्र हो सकती हैं। वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ इन क्षेत्रों में भीषण गर्मी चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकती है। इस अध्ययन के निष्कर्ष अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने कई जलवायु मॉडलों का विश्लेषण किया है। इस दौरान उन्होंने सबसे गर्म दिनों के दौरान मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके नतीजे दर्शाते हैं कि मिट्टी की नमी और तापमान के बीच यह संबंध क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है और वर्षा के पैटर्न पर निर्भर करता है। इसकी वजह से कुछ क्षेत्रों में अधिक और कुछ अन्य क्षेत्रों में कम बारिश हो सकती है। लेकिन, मिट्टी की नमी में बदलाव यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भविष्य में लू की घटनाएं कितनी गंभीर होंगी। मिट्टी की नमी में कमी से सूखे की आवृत्ति और अवधि बढ़ सकती है। इसके अलावा हीटवेव की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ सकती है।
भूमध्यसागरीय क्षेत्र के साथ कनाडा और भारत में ऐसी घटनाएं हुईं शोधकर्ताओं का कहना है कि कनाडा में 2021, भारत में 2022 और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में 2023 में आई लू की भीषण घटनाओं के दौरान ऐसा ही देखा जा चुका है, जो पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी हो गई हैं।
अगले दशक में दो बार गंभीर सूखे का खतरा
इसी तरह यूके सेंटर का इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मिट्टी की अत्यधिक नमी के कारण यूके में होने वाले सूखे जो 90 दिन या उससे अधिक समय तक चलते हैं, अब इनके अधिक बार होने की संभावना है। इससे खेती, पानी की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस तरह के गंभीर सूखे लगभग हर 16 साल में एक बार आते थे, लेकिन 2060 और 2070 के दशक तक वे हर तीन साल में एक बार भी आ सकते हैं।
लू और भीषण गर्मी की वजह से प्रतिवर्ष हो रही डेढ़ लाख मौतें...
लू और भीषण गर्मी किस कदर घातक हो सकती है इसका खुलासा मोनाश विश्विद्यालय ने अपने एक अध्ययन में किया है। इसके अनुसार लू और गर्म हवाएं दुनिया भर में हर साल होने वाली 1,53,078 मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें से हर पांचवीं मौत भारत में हो रही है। भारत में लू की वजह से हर साल औसतन 31,748 मौतें हो रही हैं। ऐसे में बढ़ती गर्मी और लू से बचाव के लिए कहीं ज्यादा संजीदा रहने की जरूरत है।