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बंगाल में TMC को बड़ा झटका: बीरभूम कोर कमेटी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कई नेता भ्रष्टाचार मामलों में गिरफ्तार

Tue, 02 Jun 2026 11:04 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

Asish Banerjee Resignation: पश्चिम बंगाल में टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। बिरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष आशीष बनर्जी ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं कोलकाता और आसनसोल में टीएमसी के कई पार्षद भ्रष्टाचार, वसूली और सरकारी राहत सामग्री घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ता दिख रहा है। 
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भ्रष्टाचार मामलों में टीएमसी नेताओं पर कार्रवाई तेज - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी ने बिरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, वहीं दूसरी तरफ कोलकाता और आसनसोल में टीएमसी के कई पार्षदों की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है। विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। ऐसे समय में लगातार हो रही गिरफ्तारियों और इस्तीफों ने टीएमसी की चिंता बढ़ा दी है।

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पूर्व डिप्टी स्पीकर और रामपुरहाट के पूर्व विधायक आशीष बनर्जी ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस फैसले की जानकारी उन्होंने टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को दे दी है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह पार्टी के सामान्य सदस्य बने रहेंगे। आशीष बनर्जी ने कहा कि वह पूर्व विधायक अभिजीत सिन्हा की बातों से सहमत हैं। अभिजीत सिन्हा ने भी बिरभूम जिला कोर कमेटी से इस्तीफा दिया था और आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान कमेटी ने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियां सही तरीके से नहीं निभाईं।

क्या चुनावी हार के बाद बढ़ा टीएमसी के अंदर असंतोष?
2026 विधानसभा चुनाव में बिरभूम जिले में टीएमसी का प्रदर्शन कमजोर रहा। जिले की 11 सीटों में से भाजपा ने 6 सीटें जीत लीं, जबकि टीएमसी को केवल 5 सीटों पर जीत मिली। इससे पहले 2021 चुनाव में टीएमसी ने यहां 10 सीटें जीती थीं और भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी और गुटबाजी बढ़ रही है।
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क्या भ्रष्टाचार मामलों में टीएमसी नेताओं पर शिकंजा कस रहा है?
इसी बीच कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 36 के टीएमसी पार्षद सचिन सिंह को पुलिस ने भ्रष्टाचार और वसूली के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो उनके घर के बाहर स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। आरोप है कि वह विरोधियों को धमकाने और मारपीट में भी शामिल थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सियालदह अदालत में पेश किया गया।
 
क्या राहत सामग्री घोटाले ने बढ़ाई मुश्किल?
आसनसोल नगर निगम के वार्ड 87 के टीएमसी पार्षद तरुण चक्रवर्ती को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर सरकारी राहत सामग्री अपने घर में रखने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक गरीबों को बांटने के लिए भेजे गए कई राहत पैकेट उनके घर से बरामद किए गए। इसके अलावा उन पर अवैध बालू कारोबार, वसूली और आवास योजनाओं के नाम पर पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप भी हैं।

क्या भाजपा सरकार बनने के बाद बढ़ी कार्रवाई?
राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टीएमसी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस लगातार भ्रष्टाचार, वसूली और हिंसा के मामलों में कार्रवाई कर रही है। पिछले एक महीने में कई टीएमसी पार्षदों और नेताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। भाजपा का कहना है कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।
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क्या टीएमसी के लिए बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौती?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार इस्तीफे, गिरफ्तारी और अंदरूनी नाराजगी टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। चुनावी हार के बाद पार्टी पहले ही दबाव में है। अब संगठन के भीतर बढ़ती असहमति और नेताओं पर लग रहे आरोप आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और ज्यादा गरमा सकते हैं।

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