अगर सावरकर होते तो देश का बंटवारा नहीं होता। देश की सुरक्षा के लिए सावरकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। लोगों में राष्ट्रीयता का की भावना भरने में सावरकर का योगदान अतुलनीय है। यह बात यहां राष्ट्रीय पुस्तकालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध इतिहासकार और देश के मुख्य सूचना आयुक्त उदय माहूरकर ने 'वीर सावरकर द फॉदर ऑफ इंडियन नेशनल सिक्यूरिटी' में कही। वे यहां पिछले दिनों आयोजित कायक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। लोगों की मांग पर माहुरकर एवं चिरायू पंडित की लिखी 'पुस्तक 'वीर सावरकर-द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन' भी लोगों से साझी की।
माहुरकर ने कहा, देश की सुरक्षा के लिए सावरकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम में मौलाना अबुल कलाम आजाद इस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष, राष्ट्रीय पुस्तकालय के महानिदेशक डॉक्टर प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह और परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर जिष्णु बसु मौजूद रहे।
बंगाल से उठी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग
इस मौके पर मौलाना अबुल कलाम आजाद इस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष ने कहा, वीर सावरकर इस देश की माटी के लाल थे। देश के लिए उन्होंने अपने जीवन के कइयों वर्ष जेल में बीता दिए। उन पर अत्याचार हुए। उनकी कुर्बानियों से आज भी देश अनजान है। उन्होंने पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी देशभक्ति और बलिदान को देखते हुए भारत सरकार को उनको 'भारत रत्न' देकर सम्मानित करना चाहिए। हम बंगाल की धरती से यह मांग सरकार से करते हैं।
घोष ने कहा, हिंदुत्व के बिना राष्ट्रवाद अधूरा है। आज हम जिस हिंदुत्व शब्द को सांप्रदायिकता के चश्मे से देखते है, वह सही नहीं है। हिंदुत्व शब्द की उत्पत्ति बंगाल से ही हुई थी। आज पूरे देश में धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता का माहौल बनाया जा रहा है। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि इतिहास को गलत ढंग से लिखा गया। इतिहास की गलत व्याख्या की गई। अब जरूरत इस बात की है कि लोगों को इतिहास के उस पहलू से परिचय कराया जाए, जिसके बारे में लोगों को अब तक नहीं बताया गया है।
बंगाल से था सावरकर का गहरा संबंध: जिष्णु
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर जिष्णु बसु ने कहा कि बंगाल के साथ सावरकर का संबंध काफी गहरा था। क्योंकि अंग्रेजों के खिलाफ देश में जो राष्ट्रीयता की भावना प्रस्फुटित हुई थी, उसका उद्गम बंगाल था। देश में जिस तरह से वामपंथ को प्रचारित और प्रसारित किया गया जिसका कुफल आज हम माओवाद और उग्रवाद के रूप में भुगत रहे हैं। आज जो पूरे देश में जातीय हिंसा और उग्रवाद है, उसके बीछे पीछे वामपंथी सोच है।
राष्ट्र तभी तरक्की करेगा जब नागरिक समर्पित होंगे: सिंह
राष्ट्रीय पुस्तकालय के महानिदेशक डॉक्टर प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह ने सभी का स्वागत करते हए कहा, राष्ट्रवाद की भावना के बिना हमारा विकास अधूरा है। कोई भी देश तभी तरक्की कर सकता है, जब उसके नागरिक अपने देश के प्रति समर्पित हो। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों के लिए सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन विशाल घोष ने किया।