शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को सीओवीआईडी सुविधा घोटाले में पार्टी के करीबी लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाई का पलटवार किया है। उन्होंने इस दौरान पीएम केयर फंड की जांच की मांग की है।
इसी के साथ ठाकरे ने नागपुर, पिंपरी-चिंचवाड़ और पुणे के नगर निकायों के अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात की सरकारों के कामकाज की भी जांच की मांग की है। उन्होंने उन्हीं स्थानों के नाम लिए जहां भाजपा का नेतृत्व था या है और ठाणे जिसे शिंदे की शिवसेना नियंत्रित कर रही है।
प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत कोष की स्थापना 2020 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए नागरिकों के लिए एक राष्ट्र कोष बनाना था। इस राहत कोष के सचिव प्रधानमंत्री हैं। अन्य सदस्य के तौर पर देश के रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री भी इसमें शामिल हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सरकार को कोविड के दौरान बृहंमुंबई नगर निगम के कामकाज की जांच करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू किया गया था, जिसमें नियमों से परे जाकर नागरिकों के जीवन की रक्षा की गई।
उन्होंने कहा, 'हम किसी भी तरह के जांच से नहीं डरते हैं। अगर आप जांच करना चाहते हैं तो आप ठाणे नगर निगम, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे और नागपुर नागरिक निकाय की भी जांच करे। पीएम केयर फंड की भी जांच करे। पीएम केयर फंड किसी भी जांच के दायरे में नहीं आता है। वहां से लाखो, करोड़ो रुपये इकट्ठा किया गया। बहुत सारे वेंटिलेटर खराब थे। हमें भी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था।'
इसी हफ्ते प्रवर्तन निदेशालय ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत और आदित्य ठाकरे के करीबी के आवास पर छापेमारी की। ईडी एक फर्म को जंबो कोविड उपचार को संचालित करने के लिए नागरिक अनुबंधों के अवंटन में अनियमितताओं की जांच कर रही है।
ओवैसी ने पीएम मोदी के अल्पसंख्यकों पर दिए गए बयान पर साधा निशाना
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव वाले पीएम मोदी के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने अल्पसंख्यकों के साथ हुए भेदभाव गिनाए और कहा कि विदेश में प्रधानमंत्री मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, जबकि भारत में वे पीछे हट जाते हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने 9 साल में पहली बार सवाल लिए और उस सवाल-जवाब में उन्होंने भारत में भेदभाव न किए जाने की बात कही। उन्होंने पूछा, मणिपुर में 300 गिरजाघरों को जला दिया गया, वह भेदभाव नहीं है? सीएए का कानून भेदभाव के आधार पर बना। भाजपा के पास एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है। ये भेदभाव के उदाहरण हैं। वहीं, पटना में आयोजित विपक्षी दलों की बैठक में नहीं बुलाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनकी पार्टी को वहां क्यों नहीं बुलाया गया।