जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान के साथ जल्द से जल्द वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की अपील की क्योंकि उसी के पास राज्य में शांति बहाली की कुंजी है। कश्मीरी पंडितों के एक समूह द्वारा आयोजित समारोह में महबूबा ने कहा कि युद्ध कभी कोई विकल्प नहीं न था और न हो सकता है। आपसी मेलमिलाप ही एक मंत्र है जिसका पालन करने की हमें जरूरत है।
पाकिस्तान से फिर बातचीत शुरू करें पीएम : महबूबा
इसके लिए हमने पीएम मोदी से पाकिस्तान से संवाद की अपील की है। हमें पड़ोसी मुल्क से यह आश्वासन लेने की जरूरत है कि वह भारत के खिलाफ अपनी सरजमीं के इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। हकीकत में, हम सभी को पता है कि राज्य में शांति की चाबी पाकिस्तान में है क्योंकि वे ही राज्य में आतंकियों को भेजते हैं।
'नए मार्ग खुलने से आजादी के नारे खुद ब खुद बदल जाएंगे'
उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में आजादी के नारों को बदलने की कोशिश किए जाने की जरूरत है। ऐसा किया जा सकता है। आखिर जम्मू-कश्मीर मध्य एशियाई देशों का गेटवे क्यों नहीं हो सकता है। यदि चीन-पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर संभव है तो यह भी संभव है। अगर हम नई सड़कों खोल दें तो आजादी के नारे खुद ब खुद बदल जाएंगे।
कश्मीरी पंडित घाटी आएं
समारोह में करीब 200 कश्मीरी पंडित शामिल हुए। इन्होंने 1990 में आतंकवाद के दौरान अपने घर छोड़ दिए थे। महबूबा ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस आना चाहिए ताकि उनकी मौजूदा पीढ़ी को पता चल सके कि उनकी जड़ें राज्य में कहां से जुड़ी हुई हैं। कश्मीर में पिछले सालों में उनके साथ जो कुछ हुआ, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है। शुरुआत आप लोग पर्यटक तौर पर आकर करें और यदि आपको सुरक्षा का अहसास होता है तो आप अपने घर आकर रहें। राज्य में समस्याएं हैं लेकिन हम सब मिलकर इनका सामना करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी पंडितों से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी के लिए माफी भी मांगी।