सद्दाम ने याचिका में बताया कि वह लक्ष्मी का मालिक नहीं, बल्कि मित्र है। लक्ष्मी उसकी गंध तीन किमी दूर से पहचान सकती है। वे दोनों साथ होते हैं तो परिवार के सदस्य की तरह संवाद करते हैं। सद्दाम के अनुसार वह गरीब परिवार से है और लक्ष्मी उसकी आय का साधन है। याची ने दावा किया कि लक्ष्मी ने पुनर्वास केंद्र में खाना-पीना छोड़ दिया है।
वह मेरे अलावा किसी और से खाना या दवा नहीं लेती। सद्दाम ने कहा कि वह लक्ष्मी को न्याय दिलाना चाहता है। उसे भी अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। इस याचिका में जल्लीकट्टू मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के2014 के फैसले का हवाला देकर कहा कि पशु को भी जीने और सम्मान का अधिकार है।
ऐसे ही एक याचिका अमेरिका के ओरलियंस काउंटी कोर्ट में पिछले वर्ष नवंबर में 47 साल की हथिनी हैप्पी के लिए दायर की गई थी। हैप्पी को 1977 में अमेरिका लाया गया और 13 वर्ष से न्यूयॉर्क के एक प्राणि उद्यान में रखा गया था। पशु प्रेमियों ने हैप्पी को हाथियों के अभयारण्य में छोड़ने की मांग की है। माना जा रहा है कि यह किसी हाथी की रिहाई के लिए दुनिया की पहली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है।