महात्मा गांधी, नरेंद्र मोदी के आदर्श हैं। उन्होंने कई अवसरों पर यह बात साबित भी कर दी है। 30 मई को दूसरी बार जब वे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे तो उससे पहले महात्मा गांधी के समाधि स्थल 'राजघाट' और अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल 'सदैव अटल' पर पुष्प अर्पित करने जाएंगे। मोदी के साथ कई दूसरे नेता भी राजघाट पहुंचेंगे। इसके अलावा विदेशों से आने वाले मेहमानों का भी 'राजघाट' और 'सदैव अटल' पर जाने का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
भाजपा में भले किसी नेता ने महात्मा गांधी को लेकर कोई आपत्तिजनक बात कह दी हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव बापू का मान-सम्मान बरकरार रखा है। लोकसभा चुनाव के दौरान भोपाल से भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने जब बापू को लेकर आपत्तिजनक बात कही तो मोदी ने उसका न केवल विरोध किया, बल्कि यह भी कह दिया कि वे इसके लिए प्रज्ञा ठाकुर को कभी मन से माफ नहीं कर पाएंगे।
ऑस्ट्रेलिया में किया था गांधी जी की प्रतिमा का अनावरण
बता दें कि इससे पहले 2014 में जब मोदी बतौर पीएम पहली बार ऑस्ट्रेलिया की अधिकारिक यात्रा पर गए थे तो उन्होंने वहां बापू की प्रतिमा का अनावरण किया था। 28 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। वहां पर मोदी ने कहा, गांधी जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसके बाद मार्च में एक चुनावी जनसभा में मोदी ने कहा, भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जो गांधी जी के विचारों का अनुसरण करती है।
गांधी जी वंश की राजनीति के खिलाफ थे, लोगों के सामने है कि आज कौन सी पार्टी वंशवाद पर चल रही है। एक उच्चाधिकारी के मुताबिक, 30 मई को सुबह नरेंद्र मोदी राजघाट पर जाएंगे। इसके बाद वे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल 'सदैव अटल' पर पुष्प अर्पित करेंगे।
25 दिसंबर को राष्ट्र को समर्पित किया गया था 'सदैव अटल'
पिछले साल 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल 'सदैव अटल' को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने भी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी थी। उसके बाद 'सदैव अटल' को आम जनता के लिए खोल दिया गया।
बता दें कि यह समाधि स्थल उसी जगह पर बनाया गया है, जहां गत वर्ष 17 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया था। समाधि स्थल पर कुल नौ दीवारें हैं। इन पर वाजपेयी द्वारा लिखित कविताओं की कुछ पंक्तियां लिखी गई हैं।