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1924 में भी आई थी केरल में बाढ़, तब बापू ने भेजे थे 6000 रुपये

Sun, 26 Aug 2018 04:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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केरल में 94 साल पहले भी इसी साल की तरह भीषण बाढ़ आई थी, उस समय बापू महात्मा गांधी ने छह हजार रुपये की रकम अपनी तरफ से दान की थी। साथ ही उन्होंने लोगों से भी राहत के लिए दान करने की अपील की थी। उस समय बापू के आह्वान पर लोगों ने अपनी जमापूंजी भी दान में दे दी थी। महिलाओं ने बाढ़ पीड़ितों के लिए अपने गहने तक दान कर दिए थे।

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पुराने सरकारी दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है। 1924 में भी राज्य में काफी ज्यादा जानमाल की हानि हुई थी। इस बार की बारिश और बाढ़ की वजह से भी अब तक 290 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए। राज्य को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान पहुंचा है।

गांधीजी ने अपने अखबारों यंग इंडिया और नवजीवन में लोगों से अपील की थी कि वे मलाबार (वर्तमान केरल) में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं। गांधीजी के अखबारों के लेखों से पता चलता है कि कई लोगों ने गांधीजी द्वारा इकट्ठी की जा रही राहत निधि में योगदान देने के लिए पैसे जोड़े थे, जिसके लिए उन्होंने अपने घर के खर्चों में भी कटौती की थी। नवजीवन अखबार के एक लेख में गांधीजी ने एक लड़की के बारे में लिखा जिसने राहत कोष में पैसे जमा करने के लिए 3 पैसे चुराए थे।
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गांधीजी ने 'रिलीफ वर्क इन मलाबार' नाम के आर्टिकल में लिखा था, "मलाबार का दुःख अकल्पनीय है।'' गांधीजी ने ये भी बताया था कि लोग उम्मीद से ज्यादा मदद के लिए सामने आए। ये एक बार नहीं कई बार साबित हुआ कि लोगों के दिल में दया बाकी है। मैंने सिर्फ दान करने की अपील की थी लेकिन लोगों ने जरूरी मानकर कर दिखाया।

1924 में केरल में आई बाढ़ से मन्नार, त्रिचूर (वर्तमान त्रिशूर), कोझीकोड, एर्नाकुलम, अलुवा, मुवट्टुपुझा, कुमाराकोम, चेंगन्नूर और तिरुअनंतपुरम प्रभावित हुए थे। मलयालम कैलेंडर में इसे सबसे बड़ी बाढ़ कहा गया था। इस बार केरल 14 में से 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

गौरतलब है कि इस बार की बाढ़ में भी देशभर से लोगों ने काफी रकम दान की है। केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में अब तक 500 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा हो चुकी है।

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