दुनिया भर में अल्फांसों आम के दिवानों की कोई कमी नहीं। अल्फांसो यानि हापूस आम का निर्यात पूरे भारत से होता है लेकिन महाराष्ट्र के कोंकण में पैदा होने वाले हापूस आम की मांग दुनिया भर में कुछ ज्यादा ही है। महाराष्ट्र के कोंकण में पाया जाने वाला अल्फांसो (हापूस) आम यूरोप, कोरिया, जापान सहित कई देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। कोंकण के आम के स्वाद का कमाल ही है कि सरकार ने असली अल्फांसो यानि हापूस आम पैदा करने वाले स्थान का मुहर यहां के बागीचों पर लगा दी है।
कोंकण के रत्नागिरी और सिंधु दुर्ग जिले सहित आसपास के अल्फांसो (हापूस) आम को जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) मिल गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने अल्फांसों को जीआई टैग देते हुए बताया कि कोंकण के अल्फांसो आम उत्पादक किसानों और उससे जुड़े लोगों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी और उन्हे जीआई टैग का फायदा मिलेगा।
कुछ साल पहले अमेरिका और आस्ट्रेलिया में हापूस आम का निर्यात शुरू हुआ और बहुत तेजी से दुनिया भर के देशों ने भारत में होने वाले इन आमों को अपनी पहली पसंद बताया। अल्फांसो आम के अलावा भारत के कई और नायाब और मशहूर चीजों को भी जीआई टैग मिल गया है। इस बार 325 उत्पादों को जीआई टैग दे दिया गया है ताकि इन उत्पादों से जुड़े लोगों को लाभ मिले। इनमें महाबलेश्वर की स्ट्राबेरी, बनारसी साड़ी, दार्जलिंग की चाय, जयपुर की नीले रंग की पॉटरी, तिरुपति का लड्डू भी शामिल है।
आपको बता दे कि जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) यानि भौगोलिक संकेतक वैसे उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है या जिसमें निहित विशेषताओं का उस स्थान विशेष से गहरा संबंध होता है।