महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित रहस्यमयी लोणार झील अब पर्यटकों के लिए विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील का दौरा किया और अधिकारियों से स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना स्थल पर पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि लोनार झील और इसके चारो ओर जैव विविधता का सागर है। भीड़भाड़ से बचाने के लिए स्थल के आसपास सावधानीपूर्वक पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने की योजना बनाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने लोणार झील के पास वन कुटी दर्शन स्थल और दैत्य सूदान मंदिर का दौरा किया।
उन्होंने कहा कि तदनुसार, एक मसौदा योजना तैयार किया जाना चाहिए जिससे इस स्थल को नया रूप दिया जा सके। ठाकरे ने अधिकारियों के साथ बैठक कर लोणार झील के विकास पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोनार झील बहुत लोकप्रिय है, बड़ी संख्या में वैज्ञानिक यहां आते हैं। इसलिए सभी प्रकार के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए। झील परिसर की जमीन का समतलीकरण व लैंडस्केप कुछ इस तरह से विकसित हो जिससे यह न लगे कि मानव निर्मित है।
उल्कापिंड पृथ्वी पर टकराने से बनी झील
मुंबई से लगभग 500 किलोमीटर दूर बुलढाणा में स्थित इस झील के बारे में कहा जाता है कि 52,000 साल पहले 10 लाख टन के एक उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के बाद गोलाकार लोणार झील निर्मित हुआ।
वैज्ञानिकों का मानना है कि उल्कापिंड छह मेगाटन परमाणु बम के विस्फोट के बराबर था। झील की गहराई करीब 150 मीटर और व्यास 1.8 किलोमीटर है। यह दुनिया का सबसे बेहतर संरक्षित गोलाकार झील है। झील का पानी खारा है।
महाराष्ट्र : कोल्हापुर के पावनगढ़ किले में मिले 400 से अधिक तोप गोले
महाराष्ट्र के ऐतिहासिक शहर कोल्हापुर स्थित पावनगढ़ किले में 400 से अधिक तोप से दागे जाने वाले गोले मिले हैं। पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक नंदिनी शाहू ने शुक्रवार को पावनगढ़ किले का दौरा किया और यहां मिले तोप गोलों को अपने कब्जे में लेकर किले में खुदाई रोकने का निर्देश दिया।
शाहू ने कहा कि पावनगढ़ किला वन विभाग के अधिकार में है, इसलिए पुरातत्व विभाग फिलहाल, कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस किले को पुरातत्व विभाग को सौंपने के संबंध में जल्द ही वन विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
बृहस्पतिवार को वन विभाग और टीम पावनगढ़ की ओर से इस ऐतिहासिक किले में दिशा दर्शक बोर्ड लगाने का काम शुरू किया गया था। इसके लिए खुदाई हो रही थी। इसी दौरान किले में स्थित महादेव मंदिर के बगल में 406 तोप के गोले मिले। संभावना जताई जा रही है कि किले में एक हजार से अधिक गोले हैं।