समारोहों के आयोजन से जनता का शांत व स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। यह चेतावनी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दी है। साथ ही उन्हें वैवाहिक समारोहों व बैंक्वेट हॉल में होने वाले आयोजनों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी दिशा निर्देश लागू करने का आदेश दिया।
हरित अधिकरण ने राज्यों को दिए शादियों में होने वाले प्रदूषण को रोकने के निर्देश
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा के लिए लाइसेंस लेने की बाध्यता से इतर नियामक संस्थाओं को पर्यावरण मानक भी लागू कराने चाहिए ताकि जल व वायु प्रदूषण रोकना सुनिश्चित किया जा सके और वातावरण खराब होने से बच सके। पीठ ने कहा, सीवर लाइनों से नहीं जुड़े सभी बड़े समारोह स्थलों पर सीवेज उपचार संयंत्र (ईटीपी) लगाने चाहिए।
इसके अलावा वर्षा जल संचयन प्रणालियों स्थापित करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। समारोह स्थलों के रसोईघर में पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए। साथ ही जैविक खाद निर्माण की सुविधा, शोर के स्तर पर नियंत्रण व पर्याप्त पार्किंग सुविधा होनी चाहिए।
पीठ ने कहा, ऐसे सुरक्षा उपायों के बिना किसी भी प्रतिष्ठान को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए और जो प्रतिष्ठान पहले से स्थापित हैं, उनकी मंजूरी का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, नियमों के उल्लंघन को देखने की जिम्मेदारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इसकी निगरानी करनी चाहिए और ऐसा करने वाले से मुआवजा वसूला जाना चाहिए।
एनजीटी ने यह आदेश वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स सोसाइटी की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया, जिसमें दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के करीब महीपालपुर और रजोकरी में बैंक्वेट हॉल और विवाह फार्मों के कारण यातायात जाम व पर्यावरण प्रदूषण फैलने के आरोप लगाए गए थे।
शोर नियंत्रक के साथ ही लगाए जाएं डीजे
एनजीटी पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पहले ही कहा था कि डीजी सिस्टम को शोर नियंत्रण व डाटा लॉगर्स के साथ ही लगाए जाने की अनुमति मिलनी चाहिए। साथ ही इनका उपयोग साउंडप्रूफ हॉल में शोर की तय सीमा के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।