महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के पारनेर तालुका स्थित लोणी-मावला में नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार कर निर्दयता से हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। शुक्रवार को जिला व सत्र न्यायालय की न्यायाधीश सुवर्णा केवले ने संतोष विष्णु लोणकर (36), मंगेश दत्तात्रय लोणकर (30) और दत्तात्रय शंकर शिंदे (27) के अपराध को संज्ञान में लेते हुए फैसला सुनाया।
नाबालिग छात्रा से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम ने आरोपियों को मानसिक रूप से विकृत बताते हुए मृत्युदंड देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपियों के बच्चों और संतोष की विधवा मां का हवाला देते हुए सजा में रियायत देने की मांग की थी। लेकिन, परिस्थितिजन्य सबूतों और गवाही के आधार न्यायालय ने तीनों आरोपियों को फांसी की सजा के साथ ही आजीवन कारावास की भी सजा सुनाई है।
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छात्रा अलकुटी स्थित विद्यालय में 10वीं की छात्रा थी। 22 अगस्त 2014 की शाम को वह स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान तीन नराधमों ने मोटरसाइकिल से उसका पीछा किया। बारिश से बचने के लिए वह एक पुल के पास रुक गई। उसी दौरान नराधमों ने उसे दबोच लिया और बलात्कार करने के बाद सबूत नष्ट करने के लिए सिर में पत्थर से प्रहार कर उसकी निर्दयता से हत्या कर दी थी।
पुलिस ने उसी दिन शाम को उसका शव बरामद किया था। पुलिस ने चार दिन के अंदर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। तत्कालीन पुलिस निरीक्षक शरद जांभले ने 55 सबूत जुटाए थे और 14 नवंबर 2014 को आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था।