कांग्रेस ने बुधवार को चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह एक सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र मतदाता सूची की डिजिटल प्रति उपलब्ध कराए। पार्टी ने महाराष्ट्र और हरियाणा के मतदान दिवस की वीडियो फुटेज की भी मांग की थी। जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र मतदाता सूची की डिजिटल प्रति देने की कांग्रेस की मांग को तर्कहीन बताया है।
निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र मतदाता सूची की डिजिटल प्रति देने की कांग्रेस की मांग को तर्कहीन बताया है। निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत यह मांग मान्य नहीं है। पार्टी की इसी तरह की याचिका को 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले सात महीनों से मतदाता सूची की डिजिटल प्रति मांग रहे हैं, लेकिन आयोग के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की ऐसी मांग नई नहीं है। यह पार्टी की ओर से आठ वर्षों से अधिक समय से अपनाई जा रही एक रणनीति का हिस्सा है। इस मुद्दे को कांग्रेस ने पहले ही 2018 में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष कमल नाथ की ओर से दायर एक रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट में उठाया था।
घटनाक्रम के जानकारों के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को न्यायिक रिकॉर्ड में मामले के अंतिम निष्कर्ष के बारे में उचित रूप से अवगत नहीं कराया गया है। कमल नाथ बनाम भारत निर्वाचन आयोग (2019) के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पाया कि निर्वाचन आयोग की दलील में दम है। चुनाव मैनुअल के खंड 11.2.2.2 में 'टेक्स्ट मोड' शब्द का इस्तेमाल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता को टेक्स्ट मोड में मतदाता सूची का मसौदा उपलब्ध कराया गया है।
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वेबसाइट पर सर्च प्रारूप में मतदाता सूची डालने का दावा नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए आयोग के सूत्रों ने बताया, संबंधित खंड में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि मसौदा मतदाता सूची को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 'सर्चेबल पीडीएफ' में डाला जाना चाहिए। इसलिए, याचिकाकर्ता अधिकार के रूप में यह दावा नहीं कर सकता है कि मसौदा मतदाता सूची को वेबसाइट पर सर्च यानी खोज के प्रारूप में रखा जाना चाहिए। इसे केवल 'टेक्स्ट मोड' में होना चाहिए और ऐसा प्रावधान किया गया है।
कांग्रेस ने मांगी डिजिटल मतदाता सूची और वीडियो फुटेज
कांग्रेस ने बुधवार को चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह एक सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र मतदाता सूची की डिजिटल प्रति उपलब्ध कराए। पार्टी ने महाराष्ट्र और हरियाणा के मतदान दिवस की वीडियो फुटेज की भी मांग की थी। कांग्रेस और राहुल गांधी ने लगातार चुनाव आयोग पर भाजपा की मदद करने के लिए मतदाता डाटा में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। राहुल ने आरोप लगाते रहे हैं कि पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में धांधली हुई थी। आयोग ने इन आरोपों से इन्कार करते हुए कहा है कि चुनाव संसद की ओर से पारित चुनावी कानूनों के तहत सख्ती से होते हैं।