Baba Adhav Passed Away: महाराष्ट्र के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता बाबा अधव का 95 वर्ष की उम्र में पुणे में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे अधव को 12 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ‘हमाल पंचायत’ और ‘एक गांव एक पनवथा’ जैसे अभियानों के माध्यम से उन्होंने मजदूरों और समाज के कमजोर तबकों के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी।
महाराष्ट्र के सामाजिक और मजदूर आंदोलनों का अहम चेहरा माने जाने वाले बाबा अधव का सोमवार रात पुणे में निधन हो गया। 95 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे बाबा अधव को 12 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
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बाबासाहेब पांडुरंग अधव, जिन्हें लोग बाबा अधव के नाम से जानते थे, समाज में बराबरी और मजदूरों के हक की लड़ाई का बड़ा नाम थे। उन्होंने ‘हमाल पंचायत’ जैसी महत्वपूर्ण यूनियन बनाकर मजदूरों की आवाज को सशक्त किया। जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें निजी अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था।
मजदूरों को संगठित करने में बड़ी भूमिका
बाबा अधव ने पुणे और महाराष्ट्र के कई इलाकों में हमालों यानी सिर पर बोझ ढोने वाले मजदूरों को संगठित किया। ‘हमाल पंचायत’ उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस संगठन ने मजदूरों को पहचान, सम्मान और अधिकार दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
उनका यह कदम महाराष्ट्र में मजदूर संगठनों के लिए एक मिसाल बन गया। decades तक बाबा अधव मजदूरों के बीच मौजूद रहे और उन्होंने इस वर्ग को आत्मविश्वास देने का काम किया। मजदूर आंदोलन की दिशा और सोच पर उनका गहरा प्रभाव रहा।
अस्पताल में बिगड़ी तबीयत
बाबा अधव को अचानक तबीयत खराब होने के कारण 12 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी सेहत लगातार गिरती गई। सोमवार रात 8:25 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और उनका निधन हो गया। उनके सहयोगी नितिन पवार ने इसकी पुष्टि की।
बाबा अधव समाज में समानता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने ‘एक गांव एक पनवथा’ अभियान चलाकर जातिगत भेदभाव को चुनौती दी। यह अभियान महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत आंदोलन बना और इससे कई गांवों में एकता और बराबरी का संदेश पहुंचा।