महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अधरवाड़ी जेल में बंद 22 साल के एक कैदी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को इस घटना की जानकारी दी। यह कैदी सुखुआ दुदराज रविदास, झारखंड का रहने वाला था। 14 अप्रैल की रात को उसे अचानक अपने जेल के सेल में खून की उल्टी हुई। तबीयत बिगड़ने पर उसे उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 15 अप्रैल की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और इस मामले में दुर्घटनावश मौत (Accidental Death) का केस दर्ज किया गया है। अब स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सुखुआ रविदास को किस अपराध के तहत जेल में रखा गया था। पुलिस ने अभी इस बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है। अगर चाहें तो मैं इस पर एक रोचक हेडलाइन भी बना सकता हूँ।
सीएम फडणवीस बोले- नासिक में दंगा भड़काने की साजिश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि नासिक में दंगे भड़काने की कोशिश जानबूझकर और प्लानिंग के साथ की गई थी। उन्होंने बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही अतिक्रमण हटाने की मांग की और उन्होंने खुद हटाना भी शुरू कर दिया। फडणवीस ने कहा कि जो लोग दंगे के दौरान दिखे, उन्होंने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, इसलिए ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने को लेकर भी उन्होंने बयान दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा अनिवार्य है, और हर किसी को मराठी सीखनी चाहिए। अगर कोई दूसरी भाषा, जैसे हिंदी सीखना चाहता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। हिंदी का विरोध करना और अंग्रेजी को बढ़ावा देना हैरान करने वाला है। अगर कोई मराठी का विरोध करता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोलापुर में न्यूरोसर्जन शिरीष वलसंगकर ने की आत्महत्या
सोलापुर में जाने माने न्यूरोसर्जन डॉ. शिरीष वलसंगकर ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। उन्होंने सोलापुर स्थित अपने आवास पर लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। पुलिस अधिकारी के अनुसार, उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि डॉ. ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया। पुलिस इस कदम के पीछे की असली वजह का पता लगा रही है। अधिकारी के अनुसार, शुरुआती जानकारी से पता चला है कि वह पिछले कुछ दिनों से तनाव में थे।
बच्चों की तस्करी मामले में महिला डॉक्टर को किया गिरफ्तार
मुंबई पुलिस ने दो छोटे बच्चों की तस्करी के मामले में कोलकाता की एक महिला दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान दो साल का एक लड़का और तीन साल की एक बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया। यह कार्रवाई वडाला ट्रक टर्मिनस पुलिस की टीम ने की। मामला तब सामने आया जब मई 2024 में एक ठेकेदार ने पुलिस को बताया कि उसके दामाद और पोते को अगवा कर लिया गया है। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता के दामाद ने ही 1.6 लाख रुपये में अपने बच्चे को तीन लोगों को बेच दिया था। इन तीनों की पहचान असमा शेख, शरीफ शेख और आशा पवार के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार किया और पूछताछ में पता चला कि लड़के को ओडिशा के भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पर एक महिला को बेच दिया गया था।
बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में उनकी पत्नी को कोर्ट ने दी कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में उनकी पत्नी शहजीन सिद्दीकी को मामले की कार्यवाही में दखल देने की अनुमति मिल गई है। शनिवार को विशेष मकोका अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली। कानूनी मामलों में दखल का मतलब यह होता है कि कोई व्यक्ति जो शुरू से मामले का हिस्सा नहीं था, वह अदालत से अनुमति लेकर कार्यवाही में शामिल हो सकता है, ताकि वह अपना पक्ष रख सके या किसी पक्ष की मदद कर सके।
बता दें कि राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी(66 वर्षीय) की 12 अक्तूबर 2024 की रात को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात उनके बेटे जीशान के दफ्तर के बाहर मुंबई के बांद्रा (पूर्व) इलाके में हुई थी। तीन हमलावरों ने मिलकर यह हमला किया था। शहजीन सिद्दीकी ने पिछले महीने कोर्ट में एक दखल याचिका दायर की थी।
उन्होंने कहा था कि उनके पति की हत्या से उन्हें अपूरणीय क्षति हुई है और इस केस में सच्चाई सामने लाना बेहद जरूरी है। इसलिए उन्हें भी कोर्ट की कार्यवाही में शामिल किया जाए।
मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई पूरी, विशेष एनआईए कोर्ट 8 मई को सुना सकती है फैसला
महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुए विस्फोट मामले की सुनवाई शनिवार को पूरी हो गई। विशेष एनआईए कोर्ट ने मामले को फैसले के लिए 8 मई के लिए स्थगित कर दिया। 17 साल पहले 29 सितंबर 2008 को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक में हुए धमाके से छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।